दोहा में अमेरिका (US) और तालिबान (Taliban) के बीच रविवार को बातचीत के बाद तालिबान का बड़ा बयान सामने आया है। दोहा वार्ता (Doha talks) खत्म होने के बाद तालिबान (Taliban) की ओर से कहा गया है कि इस बैठक में अमेरिका, अफगानिस्तान की मदद को तैयार हो गया है लेकिन वह तालिबान सरकार को मान्यता नहीं देगा। अमेरिकी अधिकारी ने शनिवार और रविवार को तालिबान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कतर के दोहा में बैठक की। अगस्त में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद यह इस तरह की पहली बैठक रही।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बताया है कि कतर में वार्ता के बाद तालिबान (Taliban) ने घोषणा की है कि अमेरिका (US) तालिबान को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देगा लेकिन अफगानिस्तान को मानवीय सहायता प्रदान करेगा। अगस्त के अंत में अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान से हटने के बाद से तालिबान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के बीच दोहा वार्ता पहली आमने-सामने की बैठक थी। बयान का हवाला देते हुए तालिबान ने कहा कि उनकी चर्चा अच्छी रही।

द हिल ने बताया कि तालिबान की ओर से बयान में कहा गया है कि अमेरिका अफगानिस्तान (Afganistan) को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए सहमत है, जबकि तालिबान ने यह भी कहा कि वे विदेशी नागरिकों के सैद्धांतिक आंदोलन की सुविधा देंगे। शनिवार को विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक अमेरिका और अन्य विदेशी नागरिकों और अफगानों के अफगानिस्तान से सुरक्षित वापसी को जारी रखना था, जिनके लिए हमारी एक विशेष प्रतिबद्धता है जो भी लोग देश छोड़ना चाहते हैं।

तालिबान के सत्ता में आने के बाद से इस्लामिक स्टेट (IS) के आतंकवादियों ने समूह, जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिका के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि कतर के दोहा में होने वाली वार्ता के केंद्र में अफगानिस्तान के तालिबान नेताओं से यह वादा लेना होगा कि वे अमेरिकी लोगों, विदेशी नागरिकों और अमेरिकी सरकार तथा सेना के मददगार रहे अफगान सहयोगियों को अफगानिस्तान से निकलने की इजाजत दें।