भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए अमेरिका एक बार फिर एच-1 वीजा की सौगात देने जा रहा है।  इसके लिए दोबारा लॉटरी निकाली जाएगी।  अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा US Citizenship and Immigration Services ने कहा है कि अमेरिका एच1बी वीजा आवेदकों के चयन लिए दूसरी लॉटरी का आयोजन करेगा। 

इस फैसले से सैकड़ों भारतीय आईटी पेशेवरों को दूसरा मौका मिलेगा, जो पहले चयन में एच1बी वीजा नहीं पा सके थे।  USCIS ने कहा कि इस साल की शुरुआत में एच-1बी वीजा के लिए कम्प्यूटरीकृत ड्रॉ का आयोजन किया गया था लेकिन इसमें अमेरिकी कांग्रेस द्वारा तय से कम संख्या में एच-1बी वीजा दिए गए। इसलिए दूसरे ड्रॉ को निकालने का फैसला किया गया है। 

एच1बी वीजा एक गैर-अप्रवासी वीजा है जिसकी मदद से अमेरिकी कंपनियां आईटी प्रोफेशनल और विशिष्ट योग्यता रखने वाले पेशेवरों को नौकरी पर रखती है। इसके तहत हजारों भारतीय और चीनियों को अमेरिकी कंपनियों में हर साल नौकरी मिलती है। अमेरिकी कंपनियां इन पेशेवरों की दक्षता पर पूरी तरह निर्भर है। ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा को सीमित कर दिया था जिससे भारतीय आईटी पेशेवर प्रभावित हुए थे। 

यूएससीआईएस ने एक बयान में कहा, हमने हाल में तय किया कि हमें वित्त वर्ष 2022 के संख्यात्मक आवंटन तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त पंजीकरण को चयनित करने की जरूरत है। यूएससीआईएस ने कहा, 28 जुलाई को पहले से पंजीकृत लोगों में से कुछ को चयनित किया है। अब 28 जुलाई को चयनित पंजीकरणों के आधार पर नए ड्रॉ के लिए आवेदन दो अगस्त से तीन नवंबर तक किए जा सकेंगे। 

यूएससीआईएस ने कहा है कि इस एच-1बी वीजा के लिए उन्हीं आवेदकों का चयन होगा जिनका पंजीकरण वित्तीय वर्ष 2022 के लिए हो चुका है।  यूएससीआईएस ने कहा है कि आवेदकों को तय समय सीमा के अंदर सही सर्विस सेंटर से आवेदन करना चाहिए। इसके ऑनलाइन आवेदन की सुविधा नहीं है। 

आवेदक को तय कागज पर फॉर्म भरना होगा। इसके फॉर्म के साथ ही आवेदक को रजिस्ट्रेशन सेलेक्शन नोटिस भी भेजना होगा। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन से पहले अमेरिका द्वारा जारी एच-1 वीजा में से आधा वीजा भारतीयों को हासिल हो जाता था। अब इसकी संख्या को पहले से कम कर दी गई है लेकिन भारतीय एच-1 वीजा में सबसे आगे रहते हैं।