अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत की। ब्लिंकेन ने कहा कि मैं उस काम की गहराई से सराहना करता हूं, जो हम एक साथ करने में सक्षम हैं और जो काम हम आने वाले महीनों में एक साथ करने जा रहे हैं।

ब्लिंकन ने कहा, ''दुनिया में कुछ ही रिश्तें है, जो भारत और अमेरिका के रिश्तों से ज्यादा अहमियत रखते हैं। भारत के साथ मजबूत संबंध अमेरिका में हर सरकार की प्राथमिकता रही है। कोरोना पर भारत की मदद को हम भूल नहीं सकते और हमने भी मदद की कोशिश की। आज हमने 25 मिलियन डॉलर की घोषणा भारत के किए की है ताकि इस महामारी से बेहतर तरीके से निपटा जाए।'' उन्होंने कहा, ''क्वाड देशों के समूह में एक दूसरे की मदद का भी संकल्प दोहराया।''

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान में शांति की स्थापना के लिए भारत का साथ मिला है और उम्मीद है कि आगे भी मिलेगा।

जयशंकर ने कहा, ''हम चौथी बार मिल रहे हैं। आज हमने वैक्सीन प्रोडक्शन को बढ़ाने पर बात की। यात्रियों खासकर छात्रों के लिए अमेरिका सरकार की मदद के लिए हमने इन्हें धन्यवाद दिया है। हमने दूसरे मुद्दों के अलावा अफ़ग़ानिस्तान पर बात की। हम सब एक शांत और स्थिर अफ़ग़ानिस्तान चाहते हैं, लेकिन किसी एक पक्ष की ही चले इससे शांति नहीं आएगी।''

उन्होंने कहा, ''इंडिया पैसिफिक (चीन के करीब के क्षेत्र) में भारत और अमेरिका के सहयोग पर भी विस्तृत बात हुई। अंतरराष्ट्रीय कानूनों को अहमियत दी जाए - इस क्षेत्र की ये सबसे बड़ी ज़रूरत है।''

भले ही अफगानिस्तान से सेना वापस कर रहे हों, लेकिन अफगानिस्तान में बने रहेंगे: ब्लिंकन

भारत और अमेरिका दोनों मानते हैं कि अफगानिस्तान मसले का कोई सैनिक समाधान नहीं है। तालिबान और अफ़ग़ान सरकार को बातचीत करनी होगी। हम अपने फोर्सेज भले ही वहां से हटा रहे हैं, लेकिन हम अफ़ग़ानिस्तान में पूरी तरह से जुड़े हुए हैं। हमारीं अफगानिस्तान में मजबूत दूतावास के तौर पर मौजूदगी रहेगी। हम आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय तरीके से अफगानिस्तान की मदद करते रहेंगे। तालिबान ताकत से अफ़ग़ानिस्तान की सभी प्रांत पर कब्ज़ा नहीं कर सकता। वहां शांति स्थापना के लिए हम बने रहेंगे।''

अफ़ग़ानिस्तान पर जयशंकर ने कहा, ''अमेरिका की फोर्स के अफगानिस्तान से पीछे हटने के अपने मायने हैं। लेकिन ज़िम्मेदारी अफ़ग़ानिस्तान के सभी पड़ोसी पर है। पाकिस्तान ज़ाहिर है कि उतना नहीं कर रहा है, जितना होना चाहिए। लेकिन ये पिछले 20 साल की कहानी है।''