दुनिया में अपने वर्चस्व को चीन से बचाने की अमेरिका की रणनीति लीक हो गई है। इसमें इस बात का ब्योरा है कि चीन की सैनिक और आर्थिक ताकत को सीमित रखने की अमेरिका की क्या योजना है। ‘एलिमेंट्स ऑफ चाइना चैलेंज’ नाम का ये दस्तावेज पहले अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने छापा। उसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 70 पेज के इस दस्तावेज को औपचारिक रूप से जारी कर दिया। दस्तावेज उसी तर्ज पर है, जिसको लेकर अमेरिका ने 1940 के दशक में सोवियत संघ को घेरने की रणनीति बनाई थी। वो रणनीति सोवियत संघ में तत्कालीन राजदूत जॉर्ज केनन ने लिखी थी और वह केनन दस्तावेज के नाम से मशहूर है।

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार द ग्लोबल टाइम्स ने इस दस्तावेज पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। गुरुवार को प्रकाशित एक संपादकीय में उसने कहा है कि इसमें कोई नई बात नहीं है। इसमें उन्हीं बातों को दोहराया गया है, जो अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो कहते रहे हैं। अखबार ने कहा कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बेसब्र और अस्थिर शासन शैली के कारण पोम्पियो जैसे राजनेताओं को अपनी महत्वाकांक्षाओं का खेल करने का पूरा मौका मिला। नतीजतन, आज अमेरिकी विदेश मंत्रालय सीआईए और रक्षा मंत्रालय से आगे बढ़कर चीन से टकराव मोल लेने वाली एजेंसी बन गया।

विश्लेषकों के मुताबिक ताजा अमेरिकी दस्तावेज पर ट्रंप प्रशासन की कंजरवेटिव सोच की पूरी छाप है। बताया जाता है इसे तैयार करने में ट्रंप प्रशासन में नीति नियोजन कार्यालय की पूर्व प्रमुख काइरॉन स्किनर की महत्वपूर्ण भूमिका है। पिछले साल स्किनर ने कहा था कि चीन के साथ अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता काफी कुछ वैसी ही होती जा रही है, जैसी सोवियत संघ के  साथ थी। अपनी इसी समझ के तहत स्किनर ने किनन डॉक्यूमेंट से कुछ सूत्र उठाए हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के इस दस्तावेज में कहा गया है कि चीन में सुधार की उम्मीद रखते हुए अमेरिका ने अनेक वर्ष गंवाए। लेकिन अब अमेरिका को चाहिए कि वह चीन को विश्व व्यवस्था के लिए एक खतरा माने। कहा गया है कि चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवाद-लेनिनवाद के एक खास रूप और उग्र चीनी राष्ट्रवाद की भावना से प्रेरित है। लेकिन चीन में कुछ बुनियादी कमियां हैं।

दस्तावेज के मुताबिक आविष्कार की सीमित क्षमता, गठबंधन बनाने में मुश्किल, जनसंख्या संबंधी असंतुलन, पर्यावरण का क्षय, व्याप्त भ्रष्टाचार और अंदरूनी व्यवस्था को कायम रखने की भारी लगात आदि चीन की खास कमियों में शामिल हैं। दस्तावेज में कहा गया है कि चीन की काफी ताकत अपनी एक अरब 40 करोड़ आबादी की निगरानी, सेंसरशिप और उन्हें वैचारिक घुट्टी पिलाने में बर्बाद होती है।

दस्तावेज में कहा गया है कि अमेरिका-चीन की संस्कृति को नहीं, बल्कि वहां के नेतृत्व को दोषी मानता है। अगर इस नेतृत्व से चीन को मुक्ति मिल जाए, तो चीन भी ताइवान, दक्षिण कोरिया या हांगकांग की तरह फल-फूल सकता है। इसमें आरोप लगाया गया है कि चीन के वुहान से शुरू हुई महामारी ने दुनिया भर में बीमारी, मौत, और सामाजिक-आर्थिक तबाही मचा दी है। इससे चीन के खिलाफ दुनिया भर में गुस्सा है। इसमें चीन पर मानव जीवन के प्रति अपमान का भाव, दूसरे देशों की भलाई के प्रति उदासीनता और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति असम्मान का भाव रखने का आरोप लगाया गया है।

दस्तावेज में कहा गया है कि चीन की चुनौती का मुकाबला करने के लिए कई मोर्चों पर कदम उठाने होंगे। तभी अमेरिका खुद और बाकी दुनिया को सुरक्षित रख पाएगा। इसमें सुझाव दिया गया है कि अपनी ताकत कायम रखने के लिए अमेरिका को अपनी संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा करनी होगी, मुक्त अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना होगा और जीवंत सिविल सोसायटी की रक्षा करनी होगी। साथ ही उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि अमेरिकी सेना दुनिया में सबसे ताकतवर और तकनीकी रूप से उन्नत बनी रहे।

दस्तावेज में शिक्षा पर खास जोर है। इसके मुताबिक अमेरिका को शिक्षा में विशेष निवेश करना होगा ताकि विज्ञान और तकनीक में उसकी बढ़त बनी रहे। साथ ही अमेरिकी राजनयिकों, सैनिक रणनीतिकारों, अर्थशास्त्रियों, तकनीक विशेषज्ञों और राजनीति शास्त्रियों को चीन की भाषा, संस्कृति और इतिहास का अध्ययन करना होगा। इसमें ध्यान दिलाया गया है कि फिलहाल अमेरिका में चीन के बारे में विशेषज्ञता रखने वाले लोगों की कमी है।