अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद अमेरिका वहां से चला गया है, लेकिन फिर भी आतंकी बचने वाले नहीं हैं। क्योंकि Russia और US अमेरिका मिलकर उनका सफाया करने जा रहे हैं। खबर है कि अफगानिस्तान में Counter Terror Operations के लिए अमेरका अब रूस के बेस का इस्तेमाल करेगा।

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हाल ही में दोनों देशों के सीनेटरों के साथ हुई बातचीत में पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका उन देशों के साथ बातचीत कर रहा है जो अफगानिस्तान की सीमा पर भविष्य में होने वाले आतंकवाद विरोधी अभियानों को लेकर अमेरिकी सेना को तालिबान-नियंत्रित देश में अधिक आसानी से सर्वेक्षण करने और लक्ष्य पर हमला करने की अनुमति देगा। जहां से अमेरिका अफगान में आतंक विरोधी अभियानों को अंजाम देगा, उन ठिकानों में रूस द्वारा संचालित बेस भी शामिल हैं। इसकी सूचना पोलिटिको ने दी। खबर है कि अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष मार्क मिले ने ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और अन्य देशों की सरकारों के साथ होने वाली चर्चाओं के बारे में खुलासा किया है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) कमांडर केनेथ मैकेंजी ने सैन्य विमानों के प्रकार और लॉन्चिंग पॉइंट्स का विवरण दिया, जिनका उपयोग तालिबान-नियंत्रित अफगानिस्तान में लक्ष्यों (आतंकियों) के खिलाफ हमले शुरू करने के लिए किया जा सकता है।अमेरिका ने दोहा समझौते के तहत 31 अगस्त को अफगानिस्तान से अपनी सेना को वापस बुला लिया है। इस दौरान मिले ने जोर देकर कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को चेतावनी दी थी कि अफगानिस्तान से जल्दबाजी में वापसी से पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और देश की सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ सकता है। मिले ने कहा कि हमने अनुमान लगाया था कि त्वरित वापसी से क्षेत्रीय अस्थिरता, पाकिस्तान की सुरक्षा और उसके परमाणु शस्त्रागार के जोखिम बढ़ जाएंगे। तालिबान ने 20 साल तक अमेरिकी सैन्य दबाव को कैसे झेला, इसकी जांच की जरूरत पर जोर देते हुए जनरल ने कहा कि हमें आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान की भूमिका की पूरी तरह से जांच करने की जरूरत है।