चीन के विस्तारवादी मंसूबों को विफल करने के लिए अमरीका ने ड्रैगन की रणनीतिक घेराबंदी और बढ़ा दी है। इसी कड़ी के तहत हिंद महासागर में अमरीका का निमित्ज क्लास का एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनाल्ड रीगन अंडमान के पास पहुंचा है। 

चीन की घुसपैठ रोकने के लिए परमाणु शक्ति से संचालित इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर अमरीका ने 90 लड़ाकू विमान और 3000 से ज्यादा मरीन तैनात किए हैं। मीडिया रिपोट्र्स के हवाले से बताया जा रहा है कि मलक्का जलडमरूमध्य के पास एयरक्राफ्ट कैरियर को कुछ समय पहले देखा गया है। माना जा रहा है कि यह हिंद महासागर में स्थित अमरीकी नेवल बेस डिएगो गार्सिया भी जाएगाा। अमरीका ने हाल ही यहां बी-2 बॉम्बर को भी तैनात किया है। बताया जा रहा है कि हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अमरीका ने अपने तीन एयरक्राफ्ट कैरियर्स को इस इलाके में तैनात किया है। इनमें से एक यूएएसएस थियोडोर रुजवेल्ट फिलीपीन्स सागर में जबकि दूसरा खाड़ी देशों के पास गश्त लगा रहा है।

जानकारी के मुताबकि अमरीका के सुपरकैरियर्स में यूएसएस रोनाल्ड रीगन को बहुत ताकतवर माना जाता है। परमाणु शक्ति से संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर को अमरीकी नौसेना में 12 जुलाई 2003 को कमीशन किया गया था। जापान का योकोसुका नेवल बेस इस एयरक्राफ्ट कैरियर का होमबेस है। यह कैरियर स्टाइक ग्रुप 11 का अंग जो अकेले अपने दम पर कई देशों को बर्बाद करने की ताकत रखता है। 332 मीटर लंबे इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर 90 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर्स के अलावा 3000 के आसपास नौसैनिक तैनात होते हैं।

बताया जा रहा है कि भारत के साथ अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया हिंद महासागर में चीन को घेरने के लिए तैयार बैठे हैं। अगर अब ड्रैगन ने कोई भी हिमाकत की तो उसका अंजाम उसे भुगतना पड़ेगा। चीन के व्यापार का बड़ा हिस्सा हिंद महासागर के जरिए ही खाड़ी और अफ्रीकी देशों में जाता है। जबकि, चीन अपने ऊर्जा जरुरतों का बड़ा आयात इसी रास्ते करता है। अगर भारतीय नौसेना ने इस रूट को ब्लाक कर दिया तो चीन को तेल समेत कई चीजों के लिए किल्लत झेलनी होगी।