अब चीन की खैर नहीं है क्योंकि अमेरिका ऐसा अदृश्य हथियार बना रहा है जो दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम होगा। इसीके लिए यूएस ने घातक स्टील्थ ड्रोन को बनाने का काम शुरू कर दिया है। ऑर्टिफिशिल इंटेलिजेंस एआई से लैस ये नई तकनीकी वाले ड्रोन दुश्मन की रडार की पकड़ में आए बिना हमला करने और खुफिया जानकारी जुटाने के काम आएंगे। पहले हुए हवाई युद्धाभ्यास के दौरान भी एआई तकनीकी से लैस ड्रोन्स ने साबित किया है वे इंसानों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। बड़ी बात यह है कि अन्य ड्रोन्स की तरह इनको उड़ान के दौरान कोई भी इंसान ऑपरेट नहीं करेगा।
यूएस एयरफोर्स लाइफ मैनेजमेंट सेंटर 2021 की गर्मियों में एक और परीक्षण के लिए प्रोटोटाइप बनाने के लिए तीन फर्मों को ठेका सौंपा है। अमेरिकी वायु सेना ने घोषणा की कि उसने मई 2021 तक मिशनाइज्ड प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए तीन प्राइवेट फर्मों के साथ साझेदारी की है। इसके तहत अमेरिकी डिफेंस कंपनी बोइंग को 25ण्7 मिलियन डॉलर, जनरल एटॉमिक्स को 14.3 मिलियन डॉलर और क्रैटोस अनमैन्ड एरियल सिस्टम को 37.8 मिलियन डॉलर की राशि दी गई है।
इन तीनों कंपनियों के ड्रोन में ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी होने के कारण इंसानों के ऑपरेट करने की जरूरत नहीं होगी। ये ड्रोन अमेरिका के स्काईबर्ग वेनगार्ड प्रोग्राम का हिस्सा होंगे। इस प्रोग्राम के तहत ये ड्रोन युद्धकाल में इंसानी पायलटों को हवा में मजबूती प्रदान करेंगे। इनकी सहायता से अमेरिका अपने दुश्मनों पर भारी पड़ेगा। ये हवा में दुश्मन के किसी भी खतरे से निपटने में सक्षम होंगे। इससे अमेरिकी पायलटों के कीमती जान की भी रक्षा होगी।
जिन तीनों फर्म को अमेरिकी वायुसेना ने ड्रोन बनाने का ठेका दिया है। उन्हें इस क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। क्रेटोस ने पहले ही एक्सक्यू.58 वेल्क्रेई ड्रोन को इस प्रोग्राम के शुरूआती चरण के लिए बनाया था। यह स्टील्थ ड्रोन देखने में अमेरिका के एफ-35 और एफ-22 की तरह है। माना जा रहा है कि भविष्य के युद्धों में अमेरिका इसका प्रयोग भी कर सकता है।