मां-बेटे की खुदखुशी के मामले में रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब गोस्वामी को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अर्नब गोस्वामी के पक्ष में कई राजनेता आगे आए हैं। पूर्वोत्तर के कई राजनेता और त्रिपुरा के सीएम बिप्लब कुमार देब ने कहा की स्वतंत्र प्रेस की आजादी को दबाया जा रहा है। अर्नब की गिरफ्तारी को 1975 की इमरजेंसी को जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में अर्नब का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें अर्नब मीडिया से कहते हुए नजर आ रहे हैं कि “मेरा जीवन खतरे में है कृपया मेरी मदद करें”।  


अर्नब ने आरोप लगाया है कि उन्हें परेशान किया जा रहा है क्योंकि उनकी पुलिस हिरासत को खारिज कर दिया गया था। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “मैं भारत के लोगों को यह बता रहा हूं कि मेरा जीवन खतरे में है। उन्होंने कहा कि वकीलों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। मुझे परेशान किया जा रहा है। मेरी पुलिस हिरासत खारिज कर दी गई। वे नहीं चाहते कि मैं बाहर आऊं। वे चीजों में देरी कर रहे हैं। आप मेरी स्थिति देख सकते हैं। वे मुझे सुबह घसीट ले गए।


रिपब्लिक टीवी ने न्यूज एंकर के हवाले से बताया कि गोस्वामी को मुंबई के अलीबाग के क्वारेंटाइन सेंटर से तलोजा जेल ले जाया गया। उसे देखने के लिए उसकी खिड़कियों पर काले परदे वाली पुलिस वैन में तलोजा जेल ले जाया गया था। उसे देखने के बाद अलीबाग सीजेएम ने अर्नब को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसे सुरक्षित रखा था। अर्णब ने जमानत देने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय से भी अपील की करते हुए कहा कि मैं उच्चतम न्यायालय से मुझे जमानत देने का अनुरोध करना चाहता हूं।