पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अंतरराज्यीय स्तर पर नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को पकड़कर उसके पास से लगभग दो करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन बरामद की। एसटीएफ के प्रवक्ता ने बताया कि तस्कर गजेन्द्र सिंह वैस को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर पकड़कर उसकी तलाशी ली गई तो उसके कब्जे से दो किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब दो करोड़ रुपये है। 

उन्होंने बताया कि मूलरूप से कन्नौज जिले के सौरिख का रहने वाला गजेन्द्र हाल के दिनों में मध्य प्रदेश के राजगढ़ में रह रहा था। प्रवक्ता ने बताया कि एसटीएफ को सूचना मिली थी कि मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह के सदस्य गोल्डन ट्राइएंगल (थाईलैण्ड, लाओस और म्यांमार) में पैदा की जाने वाली अफीम से तरह-तरह के मादक पदार्थ खासकर हेरोइन तैयार करके मुख्य रूप से मणिपुर की राजधानी इंफाल के रास्ते कई प्रदेशों में उसकी तस्करी कर रहे हैं। 

इस दौरान यह भी पता चला कि मणिपुर के रास्ते उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बेचने के लिए भारी मात्रा में हेरोइन की खेप लाई जा रही है। उन्होंने बताया कि एसटीएफ को गजेन्द्र के बारे में पता चला था कि वह नगालैण्ड के दीमापुर से हेरोइन लेकर दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस से 8 जून को कानपुर सेण्ट्रल रेलवे स्टेशन पहुंचेगा। इस पर एसटीएफ और नॉरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त टीम समय पर कानपुर स्टेशन पहुंची और गजेन्द्र को रोककर उसकी तलाशी ली। इस दौरान उसके बैग से दो किलोग्राम हेरोइन निकली। 

प्रवक्ता के मुताबिक, गिरफ्तार अभियुक्त ने पूछताछ में बताया कि उसे यह हेरोइन लखनऊ में किसी जेडी नाम के व्यक्ति को देनी थी, जिससे 17 लाख रुपये वह पहले ही ले चुका था। अब जेडी की तलाश की जा रही है। गजेन्द्र ने यह भी बताया कि वर्ष 2015 में कर्ज और घाटे के कारण टायर का कारोबार बंद करने के बाद वह भोपाल में मणिपुर के रहने वाले फकीर नामक व्यक्ति से मिला था, जिसने उनकी मुलाकात फिरोज नामक स्मैक और हेरोइन तस्कर से कराई थी। उसके साथ मिलकर वह इन पदार्थों की तस्करी करने लगा। बाद में वह अपने पैसे से स्मैक और हेरोइन लाकर लखनऊ, बाराबंकी और आसपास के जिलों में बेचने लगा। इससे पहले जुलाई 2017 में गुवाहाटी पुलिस ने भी दो किलोग्राम हेरोइन बरामदगी के मामले में उसे गिरफ्तार किया था।