आगरा के थाना ताजगंज क्षेत्र में एक महिला को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है।  जहां जिंदा जली पीड़िता संगीता की मौत के मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बता दें कि पूर्व फौजी अनिल और उनकी पत्नी संगीता पर एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज होने पर पुलिस चार दिन तक मौका के मुआयना करने नहीं गई। इसके बाद दंपती को चौकी पर बुलाया।

पुलिस ने तो जांच नहीं की दूसरी और गांव की पंचायत में अनिल और संगीता से माफी मंगवाई गई और साथ ही उन्हें अपमानित किया गया। जानकारी के लिए बता दें कि 11 अक्टूबर को बच्चों के झगड़े को लेकर यह घटना हुई। इस घटना के बाद कॉलोनी के भरत खरे और उसकी पत्नी सुनीता खरे को जेल भेज दिया। जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस ने इन दोनों सहित चार नामजद और 10-12 अज्ञात पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।


जानकारी के लिए बता दें कि भरत खरे ने अनिल और संगीता पर एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। और पुलिस ने बिना जांच किए ही दंपती को थाने बुलाया। संगीता की मौत के दो दिन बाद पुलिस ने मौका-ए-वारदात से सुबूतों को कब्जे में नहीं लिया। पुलिस ने बताया कि जलाने का आरोप भरत खरे, सुनीता खरे, दीपक, सोनू सहित 10-12 लोगों शामिल होने की बात कही है।