यूपी के कानपुर में एक मासूम बच्ची का रेप करके कलेजा निकालने वाले हत्यारों पर पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगा दिया है। कानपुर के घाटमपुर इलाके के एक गांव में पिछले साल 18 नवम्बर को दिवाली की रात सात साल की मासूम बच्ची की हत्या कर दी गई थी।

इस बच्ची की बॉडी गांव के बाहर बने काली मां के मंदिर के पास मिली थी और उसके शरीर को बुरी तरह काटकर उसका कलेजा निकाला गया था। चूंकि उस रात दिवाली थी इसलिए पुलिस को इस बच्ची की बॉडी के हालातों को देखते हुए शक हुआ था कि हो सकता है कि किसी ने बच्ची की हत्या के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा लिया हो।

पुलिस को इस मामले में जांच के दौरान पता चला कि ये बच्ची आखिरी बार गांव में अंकुल नाम के शख्स के साथ देखी गई थी और वो इस बच्ची को टॉफी दिलाने ले गया था। पुलिस ने जब अंकुल को पकड़ा तो उन्हें अंधविश्वास से जुड़ी एक भयानक कहानी के बारे में पता चला।

अंकुल ने अपने साथी वीरेन्द्र के साथ मिलकर बच्ची की हत्या की थी लेकिन उसने जब हत्या के बारे में खुलासा किया तो लोगों के होश उड़ गए। अंकुल ने कहा कि हमने हत्या से पहले इस लड़की का रेप किया था और फिर उसका पेट काटकर उसका कलेजा निकाल लिया था।

अंकुल ने कहा कि इस बच्ची की हत्या गांव के ही रहने वाले परशुराम और उसकी पत्नी सुनैना ने कराई थी। इस दंपति को बच्चा नहीं था इसलिए औलाद पाने के लिए इस पति-पत्नी ने अंधविश्वास का सहारा लिया था और मुझे और वीरेंद्र को इस काम के लिए दंपति ने 10 हजार रुपए दिए थे।
       

इस मामले में परशुराम ने कहा कि मेरी औलाद पैदा नहीं हो रही थी। डॉक्टरों के इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ तो मैंने रेलवे स्टेशन पर बिकने वाली तंत्र-मंत्र वाली किताबों को पढ़ना शुरू किया। ऐसी ही एक किताब में मैंने पढ़ा था कि अगर किसी बच्ची के शरीर के अंग को दिवाली की रात महिला को खिलाया जाए तो बच्चा हो जाता है।

इसके बाद पुलिस ने बच्ची का कलेजा खाने वाले शख्स परशुराम और उसकी पत्नी सुनैना को भी गिरफ्तार कर लिया था। ये मामला इतना चर्चित हुआ था कि खुद राज्य के सीएम योगी ने संज्ञान लिया था। उन्होंने बच्ची के घरवालों को पांच लाख की आर्थिक सहायता भी दी थी।

बता दें कि ये सभी आरोपी फिलहाल जेल में हैं। लेकिन पुलिस ने बच्ची की हत्या करने और उसका रेप करके कलेजा निकालने वाले दोनों हत्यारों अंकुल और वीरेंद्र पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए लगा दिया है। पुलिस का कहना है कि ये एक बेहद दुर्लभ घटना है इसलिए ऐसा किया गया है। हालांकि कई लोग इस बात को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं कि परशुराम और सुनैना पर एनएसए क्यों नहीं लगाया गया है।