यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्कालीन शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) विनय पांडेय को निलंबित कर दिया है। वह सरकारी कार्यों के प्रति लापरवाही और उदासीनता और सरकारी निर्देशों का पालन न करने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं।

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मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट के माध्यम से बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक विनय कुमार पांडे को निलंबित कर दिया है। उन्हें बलिया में पेपर लीक, पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने, सरकारी कामों के प्रति लापरवाही बरतने और शासन स्तर के निर्देशों का पालन न करने के लिए दोषी पाया गया है। वह इस समय साक्षरता, उर्दू एवं प्रच्य भाषा विभाग के निदेशक थे। ज्ञात हो कि विनय पांडे को 21 अप्रैल को माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद से हटा दिया गया था और उन्हें साक्षरता वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू और प्राच्य भाषाओं के निदेशक के रूप में तैनात किया गया था।

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पिछले महीने बलिया में प्रश्नपत्र लीक होने के बाद 24 जिलों में उत्तर प्रदेश माध्यमिक विद्यालय बोर्ड की परीक्षा रद्द कर दी गई थी। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मामले में कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लागू करने का आदेश दिया था। रद्द की गई परीक्षा 13 अप्रैल को फिर से आयोजित की गई। उन्हें 21 अप्रैल को माध्यमिक शिक्षा विभाग से हटाया गया। बलिया के पेपर लीक कांड की वजह से मुख्यमंत्री उनसे नाराज चल रहे थे। सूत्रों के मुताबिक विभागीय मंत्री गुलाब देवी भी विनय कुमार पांडे की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं थीं। विनय पाण्डेय को 2018 में निदेशक के पद का कार्यभार सौंपा गया था। वर्ष 2021 में उन्हें प्रोन्नत कर निदेशक बनाया गया। बीते पांच सालों से यूपी बोर्ड को नकलविहीन छवि बनाने में राज्य सरकार सफल रही थी लेकिन इस वर्ष पेपर लीक कांड हो गया। 24 जिलों में पेपर दोबारा लिया गया। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लिया था।

गौरतलब है कि विनय पांडे को सपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016 में हाईकोर्ट ने बर्खास्त करने का आदेश दिया था लेकिन इस पर तत्कालीन सपा सरकार ने इस पर अमल नहीं किया। बाद में वर्ष 2018 में भाजपा सरकार बनने के बाद उनकी बर्खास्तगी के फैसले पर अमल किया गया और उन्हें बर्खास्त कर दिया। इस पर विनय कुमार पांडे ने हाईकोर्ट से स्टे लिया और विभाग ने उन्हें दोबारा बहाल करते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक का कार्यभार सौंप दिया था।