असम की एक आदिवासी महिला लक्ष्मी ओरंग की न्यूड फोटो को सोशल मीडिया में शेयर करने के मामले में यूपी सरकार की सफाई आई है। यूपी सरकार के प्रवक्ता ने असम की महिला का पोस्ट डालने का खंडन किया है। सरकार की तरफ से जारी किए गए पत्र में बताया गया कि मुख्यमंत्री के नाम से फेसबुक पर डाली गई पोस्ट पूरी तरह से असत्य और आधारहीन है।

प्रदेश सरकार की तरफ से फेसबुक पर संपर्क किए जाने के बाद उस पोस्ट को भी हटा दिया गया। प्रवक्ता की तरफ से ये भी जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री के फर्जी अकाउंट से किए गए उस पोस्ट को सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है। 

छानबीन में पता चला कि वो पोस्ट असम से की गई थी। इस मामले में असम पुलिस से संपर्क करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात की गई है। वहीं असम पुलिस ने जानकारी दी है कि पनबाजार में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ समाज में कटुता और वैमनस्य बढ़ाने के जुर्म मे अभियोग दर्ज करके विवेजना शुरू कर दी गई है।

सम की एक आदिवासी महिला ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को मुश्किलों में डाल दिया है। दरअसल लक्ष्मी ओरंग नाम की इस आदिवासी महिला पर योगी पर उसकी न्यूड फोटो को सोशल मीडिया में शेयर करने का आरोप लगाया है। 

बता दें कि इस मामले में महिला ने कोर्ट का दरवाया खटखटाया था। लक्ष्मी ओरंग ने आईपीसी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सब डिवीजिनल न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दायर की थी। महिला के मुताबिक, 24 नवंबर 2007 को गुवाहाटी के बेलटोला में अखिल असम आदिसवासी छात्र संघ के आंदोलन के दौरान ली गई उसकी न्यूड फोटो को योगी आदित्यनाथ ने 13 जून को अपने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट किया था। इसके अलावा महिला ने सांसद राम प्रसाद सरमा के खिलाफ इस फोटो शेयर को करने को लेकर केस दर्ज कराया था।

हालांकि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (स्पेशल ब्रांच) पल्लब भट्टाचार्य ने कहा कि जांचकर्ताओं ने खुलासा किया है कि जिस फेसबुक अकाउंट से आदिवासी महिला लक्ष्मी ओरांग की नग्न तस्वीरें पोस्ट की गई थी वह फेक अकाउंट है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से यह फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया गया था। 2007 में गुवाहाटी के बेलतोला में हिंसा हुई थी। इस दौरान महिला को नग्न किया गया था और उसकी पिटाई की गई थी। भट्टाचार्य ने कहा, प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि फेसबुक अकाउंट फेक है। हम जांच में यूपी पुलिस की मदद लेंगे। 

वहीं लक्ष्मी ने कहा था कि योगी आदित्यनाथ को मेरे साथ राजनीतिक खेल खेलने का कोई अधिकारी नहीं है। मैंने किसी के आदेश पर बेलतोला में हुई रैली में हिस्सा नहीं लिया था। मैंने चार समुदायों को एसटी का दर्जा दिए जाने की मांग की थी। मैं वहां एएएसएए की सदस्य के नाते मौजूद थी। घटना को 10 साल हो चुके हैं। बिना तथ्य जाने योगी आदित्यनाथ ने तस्वीरों का दुरुपयोग किया और सोशल मीडिया पर उन तस्वीरों को लेकर टिप्पणियां की। यह पूरी तरह से गलत है। वह किसी तरह से महिलाओं का सम्मान नहीं करते। प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था और उनकी पार्टी का मुख्यमंत्री इस तरह की चीजें कर रहा है।