दुनियाभर में लोग जब एक दूसरे से मिलते हैं तो अभिवादन के लिए नमस्ते, हेलो आदि शब्दों का प्रयोग करते हैं। वहीं, कुछ लोग एक दूसरे से हाथ मिलाते हैं, गले मिलते हैं और कुछ लोग जब एक दूसरे से मिलते हैं तो घर का छोटे अपने बड़ों के पैर छूते हैं। इसके बाद बड़ा उन छोटों के सर पर अपनी हाथ को रख कर उसे दुआ देते हैं। लेकिन इस दुनिया में कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां लोग एक दूसरे से मिलने के समय तालियां भी बजाते हैं।

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लेकिन अभिवादन के सिर्फ इतने ही तरीके नहीं है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग परंपराएं हैं। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि किस देश में लोगों से मिलने की क्या परंपरा है? भारतीय घरों में किसी को जीभ दिखाकर चिढ़ाना बुरे संस्कार कहे जाते हैं। लेकिन तिब्बत में यह अभिवादन की एक परंपरा है। वहां जब लोग एक दूसरे से मिलते हैं तो वे अपने यहां आने वाले मेहमान को अपनी जीभ दिखाकर उसका स्वागत करते हैं। भले ही इस तरीके को हम लोग अपने यहां बहुत बुरा समझते हैं, लेकिन तिब्बत में मेहमानों से मिलने पर अपनी जीभ दिखाकर उसके स्वागत करने का तरीका 9 वीं सदी से ही चला आ रहा है। तिब्बत में जीभ दिखाकर मेहमानों के स्वागत करने का प्रथा तिब्बत के राजा लंगडरमा ने शुरू कराई थी। 

ग्रीनलैंड में रहने वाले एस्किमो जब एक दूसरे से मिलते हैं तो वे एक दूसरे के नाक को आपस में रगड़ते हैं जिसे कुनिक कहा जाता है। इसके साथ ही वे एक दूसरे के बालों को और गालों को भी सूंघते  है। अपने देश में यह तरीका शायद थोड़ा मजाकिया लगे लेकिन वहां के लोगों के लिए यह एक सामान्य प्रक्रिया है।

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केन्या में रहने वाले मासइ आदिवासी समुदाय के लोग जब किसी अपने से मिलते हैं, तो वे मेहमान के स्वागत के लिए एक किस्म का नृत्य करते हैं। इस नृत्य कला को अदामु नृत्य भी कहा जाता है। जिसमें लोग ज्यादा से ज्यादा ऊंचा कूदने की कोशिश करते हैं।

ओशिनिया के एक देश तवालू में रहने वाले लोग जब एक दूसरे से मिलते हैं तो मेहमान का स्वागत करने के लिए वे मेहमान के चेहरे के पास अपनी नाक को ले जाते हैं और लम्बी सांस लेकर उसकी खुशबू को महसूस करते हैं। इस तरह किए जाने वाले मेहमानों के स्वागत को सोगी कहा जाता है।