केंद्र सरकार अपने पूर्व कर्मियों पर खासी मेहरबान है। अधिकांश केंद्रीय मंत्रालय और विभाग अब स्थायी नौकरी का विज्ञापन देने से बच रहे हैं। 'सलाहकार' के नाम से रिटायर्ड लोगों को नौकरी दी जा रही हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने डिप्टी सेक्रेटरी से लेकर सेक्शन अफसर तक के ऐसे अधिकारी जो 31 दिसंबर 2020 को रिटायर हुए हैं, को नववर्ष के पहले ही दिन नई जॉब का प्रस्ताव दे दिया है। इन्हें गृह मंत्रालय में सलाहकार नियुक्त किया जाएगा। खास बात है कि सलाहकार लगने वालों से काम खूब लिया जाएगा, यह बात केंद्र सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दी है। सुबह तय समय से पहले बुला सकते हैं तो वहीं रात को घर जाने में देरी भी हो सकती है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की सीआईएस डिवीजन के मुताबिक ऐसे सलाहकार भर्ती किए जाएंगे, जो केंद्र सरकार के मंत्रालय से 31 दिसंबर 2020 को रिटायर हुए हैं। ये अधिकारी पहली जनवरी से लेकर 30 जनवरी 2021 के बीच आवेदन कर सकते हैं। ईमेल से भी आवेदन भेजने की छूट दी गई है। सलाहकार पद के लिए डिप्टी सेक्रेटरी और उसके समकक्ष पद पर काम कर चुके लोगों को चयनित किया जाएगा।

इनकी योग्यता का स्तर लेवल 12 ऑफ पे मेट्रिक्स 7वीं सीपीसी के तहत होना चाहिए। छठी सीपीसी के अंतर्गत पीबी 3 के साथ जीपी 7600 रुपये वाले अधिकारी भी सलाहकार पद के योग्य माने जाएंगे। ये सभी अधिकारी प्रशासनिक दक्षता, अदालती मामले, वित्त, आरटीआई, सचिवालय और संसदीय मामले आदि निपटाने में सक्षम होने चाहिए।

अंडर सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए अधिकारियों को भी सलाहकार के पद पर काम करने का मौका दिया जाएगा। इनकी योग्यताओं में लेवल 11 ऑफ पे मेट्रिक्स 7वीं सीपीसी शामिल है। इनके अलावा असिसटेंट कंट्रोलर 'अकाउंट्स' और सीनियर अकाउंट्स अफसर से रिटायर हुए अधिकारी भी सलाहकार लग सकते हैं। इन्हें वित्तीय प्रबंधन व्यवस्था की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।

सेक्शन अफसर के पद से रिटायर हुए व्यक्ति भी सलाहकार पद के लिए आवेदन दे सकते हैं। जो भी व्यक्ति सलाहकार के पद पर चयनित होगा, वह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अलावा अन्य कोई भी दूसरा काम नहीं करेगा। सलाहकार की सेवा किसी भी वक्त खत्म की जा सकती है। आवेदन अस्वीकार करने का कारण बताना जरूरी नहीं होगा।

तय नियमों के मुताबिक, सलाहकार को फिक्स सेलरी मिलेगी। महंगाई भत्ता एवं वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी। घर पर फोन, इंटरनेट और वाहन की सुविधा नहीं दी जाएगी। सरकारी आवास व एचआरए का प्रावधान भी नहीं रहेगा। घर से कार्यालय तक आने के लिए हर माह 7200 रुपये दिए जाएंगे।

अन्य शर्तों में सलाहकार नियुक्त होने वाले अधिकारी किसी भी थर्ड पार्टी को केंद्रीय गृह मंत्रालय की कोई भी जानकारी साझा नहीं करेंगे। इसके लिए बाकायदा गृह मंत्रालय के साथ सलाहकार को यह अनुबंध करना होगा कि वह अपने कार्य के दौरान आचार-विचार और अखंडता का पालन करने में पूरा खरा उतरेगा। अतिरिक्त छुट्टी लेने पर वेतन काटा जाएगा। कई बार सलाहकार को निर्धारित समय से थोड़ा पहले बुलाया जा सकता है। इसी तरह रात को उसे घर जाने में देरी हो सकती है।

मंत्रालय को यदि उसका काम पसंद नहीं आता है तो उसे बीच में हटाया जा सकता है। वह नियमित तौर पर अपना काम पूरा नहीं कर पाता, ईमानदारी बरतने में कोताही, उस पद कोई सरकारी नियुक्ति हो जाए, नौकरी के लिए जमा कराए दस्तावेजों में झूठ साबित हो जाए तो भी सलाहकार को बीच में नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। सलाहकार को अधिकतम पांच साल तक काम करने का मौका मिल सकता है। हर साल उसके अनुबंध को आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि ये सब समीक्षा रिपोर्ट पर आधारित रहेगा।