UNICEF के अनुसार बिहार में कोरोना वायरस के चलते 75 लाख बच्चे सीखने की क्षमता गंवा सकते हैं। इस महामारी के चलते लंबे समय से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित है, जिसकी वजह से बच्चों की स्कूली शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और आउटडोर एक्टिविटी पर खासा असर नजर आ रहा। यूनिसेफ के अनुसार, बिहार में लगभग 75 लाख बच्चों को लर्निंग लॉस का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से केवल 36.5 फीसदी के पास इंटरनेट की सुविधा मौजूद है। 3.5 फीसदी के पास कंप्यूटर की सुविधा है। वहीं स्कूल खुलने पर करीब 3 फीसदी या 7 लाख बच्चों के स्कूल लौटने की उम्मीद नहीं है।

यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, 14 से 18 साल की आयु वर्ग के किशोरों में लगभग 5.49 फीसदी लड़कियां और 0.26 फीसदी लड़कों के स्कूल छोड़ने की संभावना है। ये आंकड़े यूनिसेफ की निगरानी और मूल्यांकन विशेषज्ञ प्रसन्ना ऐश और शिक्षा विशेषज्ञ प्रमिला मनोहरन ने रविवार को शिक्षा विभाग के साथ एक ऑनलाइन बैठक में साझा किए। बैठक का आयोजन कोविड महामारी और निरंतर लॉकडाउन के चलते बिहार में बच्चों के सीखने की क्षमता पर चर्चा, रणनीति और समाधान के लिए किया गया था।

यूनिसेफ ने देश में महामारी के दौरान बच्चों के सीखने की क्षमता के नुकसान (लर्निंग लॉस) पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से किए गए एक अध्ययन का डेटा भी साझा किया। स्टडी इस साल जनवरी में कक्षा 1 से 6 के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें पाया गया कि सभी कक्षाओं में औसतन 92 फीसदी बच्चों ने पिछले साल की तुलना में कम से कम एक खास भाषा की क्षमता खो दी है। सभी वर्ग में औसतन 82 फीसदी बच्चे पिछले साल की तुलना में एक विशेष गणितीय योग्यता को खोया है।

यूनिसेफ के अधिकारियों ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 का एक डेटा भी साझा किया। इसमें बताया गया कि 93 फीसदी घरों में सेलफोन है, केवल 36.5 फीसदी घरों में इंटरनेट और केवल 3.5 फीसदी के पास कंप्यूटर है। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार ने कहा कि राज्य सरकार इस तथ्य से अवगत है कि बिहार में अधिकांश बच्चों के पास इंटरनेट नहीं है। उन्हें ऑनलाइन क्लास में शामिल होने और ई-संसाधनों का लाभ उठाने में मुश्किल होती है।

संजय कुमार ने बताया कि हमने केंद्र से डिजिटल डिवाइस उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। स्कूलों का इससे बेहतर विकल्प कोई नहीं हो सकता क्योंकि स्कूली शिक्षा के लिए एक कंप्लीट इको-सिस्टम प्रदान करते हैं। बच्चों को उनके सीखने और समग्र विकास के लिए मिडडे मील, शिक्षकों और दोस्तों के साथ बातचीत और अन्य सभी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। उन्होंने कोरोना संकट लॉकडाउन और महामारी की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए लर्निंग स्किल के लिए एक व्यापक रोड मैप विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।