नई दिल्ली। ईरान को लेकर अब संयुक्त राष्ट्र संघ भी खौफ में आ चुका है। यूएन की एटॉमिक एजेंसी ने कहा है कि ईरान ने देश में मिले परमाणु सामग्री की जांच के लिए विश्वसनीय जवाब नहीं दिया है। इसके साथ ही कहा है कि ईरान ने यूरेनियम का भंडार जमा कर लिया है जिससे आसानी से परमाणु बम बनाया जा सकता है। अब यूनाइटेड नेशंस के देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित हैं।

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ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने पर बातचीत रुकी हुई है। इस समझौते ने अधिकांश अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने के बदले ईरान के परमाणु कार्य पर कड़े लेकिन अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका द्वारा 2018 में परमाणु समझौते को छोड़ने के बाद से ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को बढ़ा दिया है जिसमें 60 फीसद तक समृद्ध यूरेनियम का उत्पादन शामिल है जो कि हथियार-ग्रेड सामग्री के करीब है।

अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते को छोड़ने से हुआ ये कि ईरान में पाए जाने वाले परमाणु सामग्री की जांच पर भी एक स्तर तक रोक लग गई। इसे कई विशेषज्ञ कई साल पहले ईरान द्वारा किए गए परमाणु हथियार पर काम से संबंधित मानते हैं। रिपोर्ट्स ने अगले महीने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सदस्य राज्यों के बोर्ड में लड़ाई छेड़ दी है। ईरान चाहता है कि एजेंसी की जांच अगले महीने बंद हो जाए।

ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि परमाणु वार्ता में शामिल पश्चिमी राजनयिकों के मुताबिक जांच को समाप्त करने में विफलता परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के प्रयासों को जटिल बना सकती है। एजेंसी ने परमाणु सामग्री के बारे में सवालों के जवाब देने में ईरान की निरंतर विफलता की कड़ी आलोचना की है। वाशिंगटन अभी भी परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए ईरान के साथ एक समझौते की मांग कर रहा है। ईरान का कहना रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम हमेशा शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए रहा है।

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वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट्स के हवाले से बताया है कि ईरान ने 43.3 किलोग्राम यूरेनियम जमा कर लिया है। पिछले तीन महीने में ईरान ने 10 किलोग्राम यूरेनियम जमा किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान का 43.3 किलो का भंडार अब उस कथित मात्रा से ऊपर है जो बताती है कि परमाणु हथियार के लिए कितनी परमाणु सामग्री की आवश्यकता हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान को 43 किलो से 66 किलो तक पहुंचने में कुछ हफ्तों का वक्त लगेगा।