इस समय रूस और यूक्रेन के बीच भयंकर युद्ध चल रहा है। इस युद्ध पर पूरी दुनिया की नजर है। यूक्रेन पर 3 गुना ज्यादा आबादी वाले और परमाणु हथियारों से संपन्न विश्वशक्ति रूस के हमले चल रहे हैं। घुसी रूस की सेना लगातार हवाई हमले, मिसाइल हमले और टैंक के साथ-साथ अत्याधुनिक हथियारों से यूक्रेन के शहरों में तबाही मचा रही है। 

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शुरूआत में जब रूस ने हमले की शुरुआत की थी तब यूक्रेन की सेना और एयरफोर्स के ठिकानों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया था और चेरनोबिल जैसे शहरों को जीतती हुई रूसी सेना तेजी से राजधानी कीव की ओर बढ़ रही थी। तब माना जा रहा था कि कुछ ही घंटों में रूसी सेना राजधानी कीव को अपने कब्जे में ले लेगी। राष्ट्रपति जेलेंस्की देश छोड़कर भाग जाएंगे, और जल्द ही तख्तापलट करके रूस यूक्रेन में अपनी पसंद की सरकार बनवाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया, और इसके पीछे का कारण है यूक्रेन की जबरदस्त युद्ध नीति।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी युद्ध का ऐलान करते हुए कहा था कि यूक्रेन को डिमिलिटराइज करेंगे और सेना के जिन लोगों को बचना हो वो हथियार डालकर घर चले जाएं। लेकिन तीन दिन की लड़ाई के बाद अब हालात ऐसे दिखने लगे हैं कि रूस के सपने पूरी तरह पूरे होते नहीं दिख रहे। भले ही बाद में रूस जंग जीत ले लेकिन अभी तो यूक्रेन के सभी बड़े शहरों में यूक्रेन की सेना रूसी सैनिकों के साथ आमने-सामने की जंग लड़ रही है। 

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रूसी सेना को बड़े नुकसान की रिपोर्टें आ रही हैं। कई शहरों को वापस यूक्रेन की सेना ने कब्जे में ले लिया है और अब बेलारूस में रूस को वार्ता की टेबल पर भी आना पड़ा है। आखिर कैसे 3 तीन दिन की जंग में यूक्रेन ने युद्ध का यू-टर्न कर दिया? इस हालात में पूरी दुनिया में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की तारीफ हो रही है. आमने-सामने के युद्ध के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक युद्ध की रणनीति से जेलेंस्की ने ऐसे हालात बना दिए हैं जिससे पुतिन हमला करके फंसे हुए दिख रहे हैं।

गोरिल्ला युद्ध रणनीति

रूस बड़ी सेना लेकर और बड़े हथियारों के साथ यूक्रेन में दाखिल तो हो गया और शहरों पर लगातार बमबारी की तस्वीरें भी आ रही हैं लेकिन यूक्रेन ने रूस से निपटने के लिए गोरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाकर सबको हैरान कर दिया है। राजधानी कीव समेत तमाम शहरों में रूसी सेना से जंग के लिए सेना के साथ-साथ आम लोगों को भी ऑटोमेटिक राइफलें दी जा रही हैं। लोगों को जंग की ट्रेनिंग दी जा रही है। ट्रेनिंग के बाद लोग शहरों की सीमाओं पर सैनिकों के साथ मोर्चे पर तैनात किए जा रहे हैं। जबकि दूसरी ओर हमले से तबाही की तस्वीरें देखकर रूसी हमले की दुनियाभर में आलोचना हो रही है।

हमलावर रूस से लड़ने के लिए यूक्रेन में राष्ट्रभक्ति की लहर सी चल पड़ी है। राष्ट्रपति जेलेंस्की खुद सेना की वर्दी में हथियार लेकर मैदान में उतर गए हैं। यूक्रेन के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद, शहरों के मेयर, यूक्रेन के सेलेब्रिटी, मॉड्ल्स, खिलाड़ी सब हथियार लेकर रूसी सैनिकों से लोहा लेने उतर आए हैं। हमलावर के खिलाफ जंग की ऐसी रणनीति और तस्वीर शायद ही कभी दुनिया ने देखी हो। पूरी दुनिया यूक्रेनियंस के इस जज्बे और देशभक्ति को सलाम कर रही है। पिछले साल अफगानिस्तान में तालिबान के हमले के वक्त राष्ट्रपति अशरफ गनी के भागने के फैसले ने तुरंत ही राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे का रास्ता साफ कर दिया था लेकिन जेलेंस्की ने साहस का परिचय दिया। अब यूक्रेन पर हमले के लिए पुतिन की लगातार आलोचना हो रही है। दुनिया के बाकी शहरों के अलावा रूस के कई शहरों में भी पुतिन के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं।

यूक्रेन को घेरने के लिए रूस ने तीन तरफ से हमला किया था। रूस की सीमा के साथ-साथ डोनबास्क इलाके से भी रूसी सेना घुसी थी तो रूस के सहयोगी देश बेलारूस से भी रूस की सेना ने यूक्रेन पर धावा बोला था। शुरू में सुमी और चेरनोबिल जैसे शहरों पर रूसी सेना ने दबदबा भी कायम किया लेकिन यूक्रेन ने अपने मजबूत गढ़ माने जाने वाले खारकीव, कीव जैसे शहरों में मजबूत मोर्चाबंदी करके अपनी पसंद का युद्धक्षेत्र तैयार किया। यहां सेना-एयरफोर्स की मोर्चाबंदी की।

इन इलाकों से जहां रूसी सैनिक अनजान हैं वहीं पूरे इलाके से यूक्रेन की सेना परिचित है और इसीलिए यहां रूसी टैंक और लड़ाकू विमानों के लगातार ध्वस्त होने की तस्वीरें देखने को मिल रही है। इसके अलावा इन इलाकों में घुस रहे रूसी मिसाइलों और फाइटर जेट को भी यूक्रेन अपने एयर डिफेंस से मार गिराने में कामयाब हो रहा है। जंग के हालात बाद में जो भी हों लेकिन अभी तो यूक्रेन रूस के दांत खट्टे करता दिख ही रहा है।