रूस और यूक्रेन को लेकर भारत के स्थिति की कई देशों ने आलोचना भी की है। हालांकि, क्वाडिलेटरल सिक्यॉरिटी डायलॉग यानी क्वाड देशों को समझ में आ गया है कि भारत ऐसा क्यों कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर बेरी ओ फारेल ने कहा कि सभी देशों के अपने द्विपक्षीय रिश्ते होते हैं और उस हिसाब से अपना स्टैंड लेना होता है। 

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आपको बता दें कि क्वाड देशों में केवल भारत ही है जिसने यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा नहीं की। यूएन में भी जब निंदा प्रस्ताव लाया गया था तो भारत ने वोटिंग से दूरी बना ली थी। क्वाड देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका और भारत हैं। भारत ने इतना जरूर कहा था कि किसी भी देश की संप्रभुता बची रहनी जरूरी है और संघर्ष रोका जाना चाहिए। 

ओ फारेल ने कहा, 'क्वाड देशों ने भारत के स्टैंड को स्वीकार कर लिया है। हम समझते हैं कि सभी देशों के अपने द्विपक्षीय रिश्ते होते हैं। यह बात सीधे तौर पर देखी जा सकती है कि भारत के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय ने इस संघर्ष को रोकने के प्रयास किए हैं। कोई भी देश इस बात से नाराज नहीं हो सकता।'

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प्रधानमंत्री मोदी ने जेलेंस्की और पुतिन दोनों को फोन करके बातचीत के रास्ते से हल निकालने की सलाह दी थी। वहीं जापान के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने कहा कि जापान चाहता है मोदी पुतिन क समझाएं और इस संघर्ष को खत्म करने में सक्रिय भूमिका निभाए।