रानीकोर विधानसभा क्षेत्र में सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी(एनपीपी) की हार उसके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। मेघालय डेमोक्रेटिक एलायंस(एमडीए) सरकार में प्रमुख सहयोगी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी(यूडीपी) का राज्य विधानसभा में ताकत बढना एनपीपी के लिए चिंता का विषय बन गया है।


यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि एमडीए गठबंधन सरकार का नेतृत्व भले ही 20 विधायकों के साथ एनपीपी कर रही हो, पर ऑक्सीजन यूडीपी ही है। अपने सात और एक निर्दलीय एसोसिएट विधायक के साथ यूडीपी एमडीए सरकार में अन्य पार्टियों के मुकाबले सबसे खास है।


रानीकोर सीट पर पियूस मारविन की जीत के बाद यूडीपी के वरिष्ठ नेता बिंदो लानोंग ने यह सुझाव दिया था कि मारविन को एमडीए सरकार में मंत्रालय दिया जाना चाहिए। फिलहाल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री प्रेस्टन तिनसोंग ने इस पर रुख स्पष्ट किया है।


उन्होंने कहा कि सरकार गठन के वक्त हुए समझौते के मुताबिक यूडीपी कोटे से तीन विधायक मंत्री बनाए गए हैं। मंत्रालय में किसी अन्य विधायक को समायोजित करने के लिए कोई और कोटा नहीं है।


पत्रकारों से बात करते हुए तिनसोंग से साफ कहा कि कोई और स्थान रिक्त नहीं है, क्योंकि समझौते के हिसाब से तीन मंत्रालय आवंटित किया जा चुका है। अब यदि यूडीपी चाहती है तो पार्टी खुद के बीच शामिल करने के विषय पर निर्णय ले सकती है।


वहीं एक अन्य एनपीपी नेता ने कहा कि यूडीपी कोटे से तीन मंत्री सहित एक को अध्यक्ष पद भी आवंटित किया गया है। यूडीपी प्रमुख डोनकुपर राय राज्य विधानसभा के अध्यक्ष हैं। बहरहाल एनपीपी का मानना है कि एमडीए में शामिल किसी दल के साथ मतभेद नहीं है। सरकार अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी।