सुप्रीम कोर्ट की ओर से आरक्षण रद्द किए जाने से नाराज चल रहे मराठा समुदाय के लिए सोमवार को उद्धव सरकार ने बड़ा ऐलान किया।  सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर (ईडबलूएस) कैटेगरी छात्रों और अभ्यर्थियों को 10 प्रतिशत का आरक्षण देने का फैसला लिया है। 

सोमवार को जारी आदेश में कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर मराठा समुदाय के युवाओं को एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में 10% आरक्षण मिलेगा। साथ ही सीधी सेवा भर्ती में मराठा उम्मीदवार 10% रिजर्वेशन का फायदा उठा सकेंगे। 

अभी राज्य में एससी-एसटी और ओबीसी के लिए 49.5 प्रतिशत आरक्षण लागू है।  इसके अलावा सभी के लिए 10 फीसदी संशोधन का कानून बनाया गया है।  इसका आदेश 2019 में जारी किया गया था।  महाराष्ट्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, वंचित जाति, खानाबदोश जनजाति, विशेष पिछड़ा वर्ग, ओबीसी और महाराष्ट्र राज्य सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) के लिए आरक्षण का कानून लागू है। 

इससे पहले के आदेश में कहा गया था कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण उन्हीं जातियों के व्यक्तियों पर लागू होता है जो आरक्षण सूची में शामिल नहीं थे।  चूंकि मराठा समुदाय एसईबीसी में शामिल है, इसलिए उन्हें राज्य में 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन अब इस फैसले को उलट दिया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था-आर्थिक रूप से कमजोर नहीं मराठा समुदाय

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मिले आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया था।  यह आरक्षण आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया गया था।  कोर्ट ने बुधवार को दिए फैसले में कहा कि 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा तय करने वाले फैसले पर फिर से विचार की जरूरत नहीं है।  मराठा आरक्षण 50 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन करता है।