सुरक्षा एजेंसियों द्वारा रणनीति में किए गए बदलाव को देखते हुए अब आतंकवादी व विद्रोही संगठन भी अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। ऐसे संगठन सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं।

इस कड़ी में देश विरोधी गतिविधि में शामिल दो नए संगठनों का सनसनीखेज खुलासा ट्विटर अकाउंट से हुआ है। पिछले कुछ महीनों से सोशल नेटवर्किंग साइट पर सक्रिय असम फ्रीडम पार्टी(एएफपी) वे असम लिबरेशन आर्मी(एएलपी) की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से देश व प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियां व साइबर सेल पूरी तरह अनजान हैं।

दैनिक पूर्वोदय के हाथ लगे दस्तावेजों से इस मामले का उजागर हुआ है। मालूम हो कि सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधि के लिए नहीं किया जा सकता।

इन दोनों संगठनों ने युवाओं को जोड़ने के लिए ऑनलाइन भर्ती भी शुरू कर दी है। जांच में पता जला है कि एएफपी व इसके सहयोगी संगठन एएलए ने ट्विटर अकाउंट इस साल 17 जनवरी को खोला। दोनों संगठन खालिस्तान, नगालैंड के विद्रोही संगठन वे जम्मू-कश्मीर के अलगाववादियों के साथ कर्नाटक के विद्रोही गुटों का भी समर्थन करते हैं।

संगठन ने असम को भारत अधिकृत असम बताया है। इस बात का उल्लेख इन संगठनों के ट्विटर अकाउंट में है। एएफपी के अबतक 278 फॉलोवर्स व एसीए के 100 फॉलोवर्स हैं। मार्के की बात यह है कि इसमें कई पाकिस्तानी हैं। देश के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रही इन बड़ी साजिश से सुरक्षा एजेंसियों का अनजान होना चिंता का विषय है।