उच्चतम न्यायालय ने पांच सौ साल से अधिक पुराने अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला दिया। विवादित भूमि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को सौंपने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में ही उचित स्थान पर पांच एकड़ भूमि देने का निर्णय सुनाया। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित भूमि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को दी जायेगी तथा सुन्नी वक्फ को बोर्ड अयोध्या में ही पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन उपलब्ध करायी जाए। गर्भगृह और मंदिर परिसर का बाहरी इलाका राम जन्मभूमि न्यास को सौंपा जाये।


इस फैसले के आने के बाद पूर्वोत्तर राज्य असम के दो मुस्लिम संगठनों ने राम मंदिर निर्माण के लिए छह लाख रुपये देने का एलान किया है। जेएसपीए के बैनर तले 21 मुस्लिम संगठन शामिल हैं। राम मंदिर निर्माण के लिए छात्र संगठन ऑल असम मोरिया युवा छात्र परिषद ने एक लाख रुपये और जेएसपीए ने पांच लाख रुपये दान देने का एलान किया है।


जेएसपीए के अध्यक्ष सैयद मुनीमुल ओवाल ने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश की एकता के प्रति समर्थन जताने की वजह से हम भी इस ऐतिहासिक फैसले का हिस्सा बनना चाहते हैं।