हाल ही में दो इंजीनियर भाईयों की ऐसी कहानी सामने आई है जो किसानों को काफी प्रेरीत करने वाली है। यह वाकया मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा का है। यहां रहने वाले दो भाई शुभम और सौरभ रघुवंशी ने इंजीनियर की प्राइवेट नौकरी छोड़कर झरबेरा फूलों की खेती (Jhabrera Flowers) करनी शुरू की। अब इस खेती से दोनों भाई लाखों रुपये कमाने के साथ ही कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
शुभम और सौरभ ने झरबेरा फूलों के पॉलीहाउस में स्टैडी की और अपने 28 एकड़ खेत में से एक एकड़ जमीन को इसके लिए बनाना शुरू किया। काली मिट्टी वाली जमीन इन फूलों की खेती के लिए फायदेमंद नहीं होती है, इसलिए उन्होंने जिले के अलग-अलग स्थानों से करीब ढाई महीने में मिट्टी लाकर खेत को तैयार कर पॉलीहाउस बनवाकर झरबेरा का प्लांटेशन किया।

आपको बता दें कि झरबेरा फूलों के प्लांट हॉलैंड से आते है। इन फूलों की खेती के लिए संतुलित तापमान और सिंचाई के शुद्ध पानी की आवश्यकता होती है। एक एकड़ के बने पॉलीहाउस में 25 हजार पौधे विशेष प्रकार की मिट्टी में लगाए जाते है। इन पौधो में बोर नहीं बल्कि कुएं का पानी को फिल्टर कर ड्रीपिंग द्वारा प्रतिदिन 24 मिनिट पानी दिया जाता है। साथ ही पत्तियों के शोवरिंग की जाती है। पॉलीहाउस के चारो ओर लगे पर्दे को समय समय पर खोलकर और ढांककर तापमान को नियंत्रित किया जाता है। इन पौधो का प्लांटेशन का अगर उचित रखरखाव किया जाए तो करीब छह साल तक इसमें फूल आते है।

झरबेरा के प्लांटेशन के दो महीने बाद फ्लोवर आने लगते है, दो दिन के अंतराल में फूल पूरे खिल जाते है। इन फूलों को तोड़कर बैकेट में भरें पानी में रखा जाता है ताकि ताजगी बनी रहे इसके बाद इन फूलों के पंखुड़ियों वाले हिस्से को पॉलिथिन द्वारा पैक किया जाता है ताकि फूलों में डस्ट न जमने पाए फिर इनको बाजार तक व्यवस्थित भेजा जाता है। इन फूलों की पंखुड़ियों को पॉलिथिन में पैक कर 10/10 के बंच बनाकर  शुभम और सौरभ अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से हैदराबाद ले जाकर बेचते हैं।

झरबेरा के एक फूल की लागत एक रुपए से डेढ़ रुपए आती है और यह फूल बाजार में 6 रुपए से लेकर 10 रूपये में बिकता है। यह फूल हैदराबाद से देश के सभी बड़े शहर मंबई दिल्ली, चेन्नई, बंगलौर, इंदौर में इन फूलो की अच्छी खासी मांग है। अब बाजार खुला है तो शादियों और कार्यक्रम के आयोजन में इस फूल की कीमत 20 रूपये प्रति नग जाने की उम्मीद है।