राज्य में एक बार फिर से अप्रत्यक्ष रूप से एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया लंबित कराने की कोशिशें बढ़ गई है। संदिग्ध मतदाताओं के लिए और अतिरिक्त समय की मांग की जाने लगी है। जबकि एनआरसी निदेशालय और इससे जुड़े तमाम आधिकारिक अंग यह कई बार स्पष्ट कर चुके है कि अंतिम ड्रफ्ट एनआरसी जारी होने के बाद भी पंजी से बाहर किए गए लोगों को अपनी शिकायतें और दावे पेश करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

उसी के बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक अंतिम तौर पर राष्ट्रीय नागरिक पंजी का अद्यतन स्वरूप सार्वजनिक किया जाएगा। पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के समय से ही जारी एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया पिछले पांच वर्षो में किसी न किसी कारण लंबित होती आई है। 

कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाते आए हैं। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद आखिरकार विगत 31 दिसंबर 2017 की आधी रात पहली ड्राफ्ट एनआरसी जारी की गई। शेष ड्राफ्ट विगत 30 जून को जारी हो जाना था। लेकिन राजनीतिक तिकड़मों ने कुछ ऐसा ताना-बाना बुना कि बाढ़ से पांच जिलों के एनआरसी सेवा केन्द्र निष्क्रिय हो जाने के बहाने सुप्रीम कोर्ट को इसे 30 जुलाई तक प्रकाशित करने को मना लिया गया। 

एनआरसी राज्य संयोजक प्रतिक हजेला का दावा है कि 30 जुलाई को अंतिम ड्राफ्ट एनआरसी के द्वारा जारी कर दी जाएगी। लेकिन इसे लेकर राजनीतिक तिकड़में आसमान पर पहुंच गई हैं। एनआरसी अद्यतन का काम असम में हो रहा हैं। मगर इसपर आंकडों की बाजीगरी देश की राजधानी से जारी होने लगी है। किसी एनजीओ के हवाले संदिग्ध मतदाताओं और अप्रर्याप्त नागरिकता दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों का हवाला दे और अधिक समय मांगा जा रहा है। 

जबकि आधिकारिक तौर पर साफ किया जा चुका है कि अंतिम ड्राफ्ट एनआरसी से बाहर किए गए लगभग डेढ़ लाख आवेदकों के दावों और शिकायतों का एक और मौका दिया जाएगा। कथित सिविल सोसाइटी और कुछ अन्य निहित तत्वों की कोशिश किसी न किसी तरह एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया को लंबित बनाए रखने की अधिक महसूस होती है। 

आरोप लगाए जा रहे हैं कि असम में एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया ब्यूरोक्रेटिक लालफीताशाही और पूर्वोग्रह पूर्ण प्रक्रिया से भरी है। इसके चलते लगभग डेढ़ लाख लोगों को इससे बाहर किया जा रहा है। 

यह तो सबको मालूम है कि एनआरसी अद्यतन की प्रक्रिया असम में शुरू ही इसलिए की गई है कि यहां रह रहे अवैध विदेशियों की पक्की पहचना हो सके। अवैध विदेशियों की संख्या को लेकर वर्षों से दावे-प्रति-दावे होते आ रहे हैं। विदेशी नागरिक पहचना न्यायाधिकरण भी इसीलिए संचालित है। 

अब जब सुप्रीम कोर्ट की सतर्क निगरानी में पूरी सख्ती से एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया जारी है तो संदिग्ध पाए जा रहे दस्तावेजों का हर तरह से सत्यापन तो लाजिमी  ही है। उपर्याप्त या या संदिग्ध दस्तावेजों और इनको एनआरसी में शामिल होने के लिए प्रस्तुत करने वालों की संख्या को लेकर आखिर इतनी बेचैनी क्यों हो रही है। 

लगभग तीन करोड़ तीस लाख आवेदकों के बीच डेढ़ लाख के आसपास लोगों के अंतिम ड्राफ्ट से बाहर होने का मतलब यह तो कतई नहीं होता कि ये सबके सब विदेशी नागरिक ही होंगे।