पर्यावरण को हो रही क्षति से सुरक्षा करने के लिए त्रिपुरा सरकार प्रयासरत है। इसके लिए सरकार ने एक कदम उठाया है। मंगलवार को दक्षिण त्रिपुरा के जोलीबाड़ी में 70 वे राज्य स्तरीय वनमहोत्स्व 2019 का आयोजन किया गया। आयोजन में स्थानीय लोगो के साथ विभिन्न स्कूलों के सैकड़ो विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन सूबे के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब द्वारा स्थानीय विधायकों, पीसीसीएफ डॉ अलिंद रस्तोगी सहित वन विभाग के अधिकारियो के साथ पौधरोपण करके किया गया। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति द्वारा कम से कम एक पौधा लगाये जाने की अपील की। साथ ही आगे बढ़कर बेहतर कल के लिए पेड़ लगाए जाने की बात की।

उन्होंने कहा कि केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार ने भी वन कानूनों को आसान बनाने के लिए पहल की है, जैसे कि बांस को वन सूची से बाहर रखा जाए और इसे घास घोषित किया जाए ताकि राज्य के आम लोग इसका उपयोग अपनी आजीविका कमाने सामान बनाने में कर सकें।

मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि त्रिपुरा हिमालयी राज्यों में से एक है। यहां पर 60 प्रतिशत से अधिक वन आच्छादन है। इस वजह से यहां से उन हिस्सों के लिए ऑक्सीजन की भरपाई होती है जहां वन कम है अथवा नहीं है।

सरकार राज्य को सुंदर बनाने और पर्यटकों को आकर्षित करने की दिशा में काम तो कर ही रही है। साथ ही उन परिवारों के लिए भी सहायक है, जो काली चोटी वाले सड़को के दोनों और फूल और फल वाले पौधे लगाएंगे। बता दें कि सरकार ने ऐसे परिवारों के लिए हर महीने 200 रूपये देने के हिसाब से 24 करोड़ रूपये का बजट में प्रावधान रखा है।

साथ ही वन मंत्री मेवात कुमार जमातिया ने कहा कि वन संवर्धन के लिए नीतियां बनाने के साथ ही विकासात्मक गतिविधियां करने पर जोर दिया गया। वहीं पीसीसीएफ अलिंद ने ग्लोबल वार्मिंग पर अपने विचार साझा किये। कार्यक्रम का समापन 5000 पौधों के मुफ्त वितरण और अधिकारियों की विदाई के साथ हुआ।