पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नानी के घर चले गए। खुद राहुल गांधी ने ट्विट के जरिए यह जानकारी दी थी। भाजपा ने इसको लेकर उनका मजाक भी उड़ाया था।

त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव के अब तक के जो रुझान आए हैं उससे स्पष्ट है कि यहां कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल पाएगा जबकि पार्टी ने 59 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। त्रिपुरा में विधानसभा की 60 सीटें हैं लेकिन चुनाव 59 सीटों पर ही हुआ था। चारिलाम सीट से सीपीएम उम्मीदवार रामेन्द्र नारायण देबबर्मा के निधन के कारण यहां चुनाव स्थगित कर दिया गया। चारिलाम सीट के लिए अब 12 मार्च को वोटिंग होगी। त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस शुरु से ही कहीं मुकाबले में नहीं थी। कांग्रेस हारी हुई बाजी लड़ रही थी। एक तरह से कहें तो उसने सिर्फ चुनाव लडऩे के लिए लड़ा था। न तो कांग्रेस के पास न तो कोई बड़ा चेहरा था और न ही संगठन के स्तर पर पार्टी मजबूत थी।

मुख्यमंत्री माणिक सरकार खुद कह चुके थे कि इस बार उनका मुकाबला भाजपा से है। खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मतदान से ठीक दो दिन पहले चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे।  त्रिपुरा में वोटिंग 18 फरवरी को हुई थी। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2018 आते आते कांग्रेस के पास सिर्फ दो विधायक रह गए। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस ने लेफ्ट फ्रंट से हाथ मिलाया था जिसके विरोध में 6 विधायक पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। पिछले साल अगस्त में ये 6 विधायक सुदीप रॉय बर्मन के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हो गए।

पिछले साल 22 दिसंबर को कांग्रेस विधायक रतन लाल नाथ भी भाजपा में शामिल हो गए। इस तरह कांग्रेस के 7 विधायक भाजपा में चले गए जबकि एक विधायक सीपीएम में शामिल हो गया। हालांकि इस साल जनवरी में विधानसभा के अध्यक्ष ने एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत रतन लाल नाथ को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दे दिया था। जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए पहुंचे तो उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने अंदरखाने सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट से हाथ मिला लिया है। राजनीतिक विश्लेषक भी इसे कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा बता रहे थे।