त्रिपुरा की भाजपा-आईपीएफटी सरकार ने राजनीतिक हिंसा के उन सभी मामलों की जांच का फैसला किया है, जिनमें मृतकों के परिवार अपराधियों को सजा देने के लिये उचित जांच की मांग कर रहे हैं।अधिसूचना के अनुसार सरकार ने कानून मंत्री रतन लाल नाथ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो जांच पूरी होने के बाद अपनी अनुशंसाएं देगी।

नाथ के अलावा कानून विभाग के प्रधान सचिव डी एम जमाटिया को सदस्य और गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव देवेन्द्र रियांग को संयोजक के रूप में समिति में शामिल किया गया है। हालांकि 2018 के विधानसभा चुनाव में हार के साथ 25 साल बाद सत्ता से बाहर हुई माकपा ने इस फैसले पर चिंता जताई है। पार्टी की राज्य समिति के सदस्य पबित्र कार ने कहा कि समिति का गठन पार्टी के सदस्यों को प्रताड़ित करने के लिये किया गया है और यह बीते एक साल में हुई हिंसक घटनाओं की जांच नहीं करेगी।

रियांग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है, राज्य सरकार ने उन सभी मामलों की जांच का फैसला किया है जिनमें बहुत समय पहले राजनीतिक हिंसा के चलते पीड़ितों की मौत हुई थी। पीड़ितों के परिवार के सदस्य इन मामलों में उचित जांच की मांग कर रहे हैं ताकि कानूनों के प्रावधानों के तहत वास्तविक अपराधियों को सजा दी जा सके।