त्रिपुरा से पड़ोसी देश बांग्लादेश को चाय निर्यात किए जाने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है। एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी है। त्रिपुरा चाय विकास निगम लिमिटेड (टीटीडीसी) के अध्यक्ष संतोष साहा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सरकार की बांग्लादेश में श्रीमंगल के एक चाय नीलामी केंद्र के जरिये चाय का निर्यात करने की योजना के बारे में केंद्रीय मंत्री से बात की है। यह चाय नीलामी केंद्र त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के कैलाशहर से केवल 5 किमी दूर है। उन्होंने कहा कि इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) ने भी बांग्लादेश सरकार के समक्ष यह मामला उठाया है। 

साहा ने कहा, मुझे बताया गया था कि बांग्लादेश के आम चुनाव के बाद, पड़ोसी देश को त्रिपुरा से चाय निर्यात करने का मुद्दे पर बातचीत होगी। हमें उम्मीद है कि कुछ सकारात्मक सामने आएगा। टीटीडीसी के अध्यक्ष ने कहा कि बांग्लादेश भारत को छोड़कर, विदेशों से भारी मात्रा में चाय का आयात करता है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में नई भाजपा-आईपीएफटी सरकार, हरी चाय की खेती को प्रोत्साहित करके चाय उद्योग के लिए अच्छे दिन लाने के लिए गंभीर है। 

वर्तमान में राज्य में 90 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है जो मुख्यतः सीटीसी किस्म का है। उन्होंने कहा, राज्य के कुछ चाय बागानों में ग्रीन टी का उत्पादन शुरू हो चुका है। हम इसे और चाय बागानों में विस्तारित करना चाहते हैं, लेकिन यह समय लेने वाली प्रक्रिया है। इसे विभिन्न चरणों में किया जाएगा। राज्य में उत्पादित चाय की ब्रांडिंग पर साहा ने कहा कि त्रिपुरा के लिए ‘लोगो’, भारतीय चाय बोर्ड (टीबीआई) के विचाराधीन है और अगले कुछ दिनों में इसे मंजूरी मिल जायेगी। टीटीडीसी के अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि त्रिपुरा चाय के ‘लोगो’ की अनुपस्थिति चाय उत्पादकों के लिए एक उचित मूल्य के साथ अपने उत्पादों के विपणन के लिए एक गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा, सिलिगुड़ी या कोलकाता के चाय की नीलामी के बाजारों में तैयार चाय का परिवहन करना बहुत कठिन है। एक बार लोगो आवंटित हो जाने के बाद, इस समस्या का समाधान हो जाएगा।