बीएसएफ ने देश में रोहिंग्या मुस्लिमों की घुसपैठ पर नियंत्रण के लिए त्रिपुरा में 856 किलोमीटर लंबे भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर अलर्ट जारी किया है। बीएसएफ के आईजी(त्रिपुरा फ्रंटियर) एस.आर. ओझा ने मंगलवार शाम पत्रकारों से कहा, रोहिंग्याओं की घुसपैठ के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि पूर्व में इसी समूह की सीमा पार गतिविधियां देखी गई है। कई रोहिंग्याओं ने बांग्लादेश में शरण ले रखी है,इसलिए हमने किसी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए त्रिपुरा में सीमा की रखवाली में लगे अपने लोगों को अलर्ट रहने के लिए कहा है। आईजी एस.आर.ओझा ने कहा कि म्यांमार के रखाइन प्रांत में संघर्ष के बाद त्रिपुरा में अभी तक एक भी रोहिंग्या ने प्रवेश नहीं किया है।

उन्होंने मीडिया को जानकारी दी कि बीएसएफ की त्रिपुरा फ्रंटियर बीएसएफ के उन जवानों की याद में 22 अक्टूबर को दौड़ का आयोजन करेगी जिन्होंने सीमा की रक्षा के लिए अपनी जिंदगियां कुर्बान कर दी। बीएसएफ हॉफ मैराथन में कोई भी भाग ले सकता है। इवेंट में त्रिपुरा के प्रतिष्ठित लोग और खेल हस्तियां भाग लेगी। आपको बता दें कि रोहिंग्या शरणार्थियों की घुसपैठ, अवैध प्रवासियों और मवेशियों की तस्करी को रोकने के लिए त्रिपुरा सरकार ने सोनामुरा में भारत बांग्लादेश सीमा से सटे खुले इलाके में समय बद्ध तरीके से फेसिंग का काम हाथ में लिया है। पश्चिम त्रिपुरा में सेपाहिजाला के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट व कलेक्टर प्रदीप चक्रवर्ती ने सोमवार शाम सोनामुरा में वेस्टर्न बॉर्डर से लगती सीमा पर रह रहे ग्रामीणों के साथ बैठक की। ये लोग वायर फेंसिंग का पिछले दस साल से विरोध कर रहे हैं। ग्रामीण प्रशासन को कंटीले तारों की फेंसिंग नहीं करने दे रहे हैं। पहले चरण में 800 मीटर मिश्रित कंटीले तार जीरो लाइन से 150 यार्ड अंदर लगाए जाएंगे। बाद में दुर्गापूरा और नबादविप चंद्र नगर गांवों के सघन आबादी वाले इलाकों के 20 मीटर अंदर 2.229 किलोमीटर सिंगर लाइन कंटीले तार लगाए जाएंगे। सोनामुरा के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट सुमित लोध ने मंगलवार को कहा कि जिन इलाकों में कंटीले तारों की बाड़बंदी नहीं हो पाई है वहां फेंसिंग का काम पूरा करने को लेकर एक दशक से ज्यादा समय से नागरिकों व सरकार के बीच टकराव चल रहा है।
त्रिपुरा की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कानून की गाईडलाइन के मुताबिक बांग्लादेश से लगी 856 किलोमीटर सीमा को कंटीले तारों से कवर करने की कोशिश की है लेकिन सीमा के 150 यार्ड्स के अंदर रह रहे लोग इसके खिलाफ हैं। उन्होंने कंटीले तारों की फेसिंग के काम को रोक दिया। इस कारण पूरा बॉर्डर अपराध और तस्करी के लिए असुरक्षित बन गया है। लोध ने कहा, बीएसएफ पर तस्करों के हमले की हालिया घटना और बॉर्डर मैनेजमेंट पर बॉर्डर सिक्योरिटी पर्सनल्स के कड़े विरोध ने सरकार को जल्द से जल्द फेंसिंग वर्क खत्म करने के लिए उद्यत किया है ताकि देश की सुरक्षा सुनिश्चित हो। मीटिंग में ग्रामीणों ने पुनर्वास, उचित मुआवजा और जीवन व संपत्ति की सुरक्षा और रोजगार की मांगें रखी लेकिन सरकार के फैसले के मुताबिक उन्हें एकमुश्त प्रोपर्टी की वैल्यू दी जाएगी जो मिश्रित कंटीले तारों की फेंसिंग और सड़क के लिए अधिग्रहित की जाएगी। लोध ने कहा कि पहले चरण में गोमती नदी के तट पर कंटीले तारों की बाड़बंदी की जाएगी,जहां कोई बसावट नहीं है। बाद में बांग्लादेश से अंतिम कन्फर्मेशन के बाद शेष बचे इलाके में फेंसिंग का काम किया जाएगा।