त्रिपुरा में भाजपा की जीत के बाद हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं हैं जिसको देखते हुए राज्य के कई इलाकों में धारा 144 लगा दी गई है

राज्य में तनाव 1917 की रूसी क्रांति के नायक व वामपंथ के प्रणेता व्लादिमीर लेनिन की दो प्रतिमाएं तोड़ने के बाद फैला हैं। हिंसा ने पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले लिया है। ऐसे में विपक्षी दल भी सरकार पर हमलावर हो गए हैं तो वहीं बीजेपी के कई नेता भी इस आग को बयान बाजी करने से नहीं चूक रहे हैं।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने हिंसा की निंदा करने के साथ ही कहा कि यह बात भी कहीं कि देश में विदेशी नेताओं की प्रतिमा की जरूरत नहीं है।


यहां महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, आंबेडकर, दीनदयाल उपाध्याय, लोहिया समेत तमाम विचारक हैं।
अहीर का कहना है कि त्रिपुरा में जो हिंसा होती थी, वो खत्म हो जाएगी। हंसराज अहीर ने वामपंथी लोगों को खूनी बताते हुए कहा कि वामपंथी लोग हिंसा में विश्वास करते हैं,वे किस आधार पर बीजेपी पर आरोप लगा सकते हैं।


त्रिपुरा में माकपा की हार के बाद से वामपंथी नेताओं और उनके प्रतीकों पर हमले तेज हो गए हैं। दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया कस्बे में एक चौराहे पर लेनिन की प्रतिमा सोमवार को देर रात बुलडोजर से ढहा दी गई।

फाइबर की इस प्रतिमा का अनावरण कुछ माह पहले ही माकपा नेता प्रकाश करात ने किया था। इस प्रतिमा को गिराने के मामले में बुलडोजर के ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया था, बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। देशभर में मूर्ति तोड़ने की घटना की आलोचना के बीच मंगलवार को दक्षिण त्रिपुरा के सबरूम मोटर स्टैंड इलाके में भी लेनिन की मूर्ति तोड़ दी गई।

त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय ने इस मामले में ट्वीट कर कहा, 'लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई एक सरकार जो कर सकती है, लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई दूसरी सरकार उसे पलट सकती है और इसका उलटा भी हो सकता है।'

इसके साथ ही इस पूरे मामले पर विवादित बयानों के लिए चर्चित सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा, 'लेनिन तो विदेशी है, एक प्रकार से आतंकवादी है, ऐसे व्यक्ति की मूर्ति हमारे देश में क्यों? वे कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्यालय के अंदर मूर्ति रख सकते हैं और पूजा कर सकते हैं।' केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा त्रिपुरा के राज्यपाल को कानून व्यवस्था पर नजर बनाए रखने को लेकर लिखे गए पत्र की खबरों के बीच गवर्नर तथागत रॉय के ट्विटर हैंडल पर इसका खंडन किया गया है। तथागत की ओर से ट्विटर पर लिखा गया है कि उन्हें केंद्रीय गृहमंत्री की ओर से इस तरह का कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।



बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने भी लेनिन के मूर्ति ढहने पर एक ट्वीट किया था, जिसे बाद में हटा दिया गया. माधव ने लिखा था, 'लोग लेनिन की मूर्ति गिरा रहे हैं, रूस में नहीं, त्रिपुरा में. 'चलो पलटाई'. CPI(M) के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक राम माधव और तथागत रॉय के ट्वीट की तस्वीर डालते हुए लिखा गया कि बीजेपी/आरएसएस और त्रिपुरा के राज्यपाल हिंसा भड़का रहे हैं।