राज्यसभा से तीन तलाक बिल पास हो गया है जिसके चलते अब भारत में मुस्लिम महिलाओं को तीन बार तलाक बोलकर नहीं छोड़ा जा सकेगा। राज्यसभा में इस बिल के पक्ष में 99 वोट पड़े, जबकि विरोध में 84 वोट पड़े। इसके साथ ही अब मुस्लिम ​महिलाओं को तीन बार तलाक बोलकर छोड़ने की कुप्रथा से आजादी मिल गई है। इस विधेयक का पुरजोर विरोध करने वाली कांग्रेस कई अहम दलों को अपने साथ बनाए रखने में असफल रही।

पूर्वोत्तर राज्यों में भी बढ़ी तीन तलाक की घटनाएं

आपको बता दें कि मुस्लिम महिलाओं को तीन बार तलाक बोलकर छोड़ देने की घटनाएं पूरे भारत में हो रही हैं। पूर्वोत्तर के उन राज्यों में भी मुस्लिम महिलाओं के साथ ऐसी घटनाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम तथा नागालैंड में ऐसी घटनाएं काफी हुई हैं जिसके चलते पीड़िताएं न्याय की गुहार लगाती फिर रही थी। हालांकि अब उनके साथ न्याय होगा।

मेघालय की मुस्लिम महिला ने ली थी भीष्म प्रतिज्ञा

पूर्वोत्तर में तीन तलाक का सबसे चर्चित मामला मेघालय का रहा है। यहां पर गारो हिल्स की रुखसाना नामक एक युवती ने तीन तलाक के मुद्दे पर भीष्म प्रतिज्ञा कर डाली थी। 25 वर्षीय रुखसार एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी में सीईओ के पद पर अमरीका में कार्यरत थी। लेकिन जब वो अपने घर आई तो पता चला की पिता ने रुखसार की मां को तलाक दे दिया था। इसके चलते उसे समाज की इस कुप्रथा नफरत हो गई थी और उन्होंने भीम प्रतिज्ञा कर डाली कि वो अपने समाज के लड़के से शादी नहीं करेगी बल्कि किसी अन्य समाज के लड़के से करेगी।

मणिपुर के गवर्नर ने की थी तीन तलाक को खत्म करने की अपील 

आपको बता दें कि तीन तलाक प्रथा को लेकर मणिपुर की गवर्नर नजमा हेपतुल्लाह ने कहा था कि इस प्रथा को तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। साथ ही कहा था कि यह महिलाओं का उत्पीड़न करने का जरिया है। यह विरोधाभासी है कि हम फेसबुक और व्हाट्सएप के युग में रह रहे हैं और 1400 साल पुरानी प्रथा के पक्षधर बने हुए हैं।

असम में बीवी को डाक से भेज दिया था तलाक

असम के नागौन के जूरिया थाने के अन्तर्गत आने वाले मेहरीपुर के रहने वाले और असम अल्पसंख्यक विद्यार्थी यूनियन के नेता अब्दुल लतीफ के नाम भी तीन तलाक को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पत्नी जास्मिना बेगम को अवैध रूप से तीन तलाक दिया था। जास्मिना ने आरोप लगाया था कि जब वो अपने मायके में थी तब उनके पति ने उन्हें द्वारा डाक से तलाकनामा भेजा था।

मेघालय के मुस्लिमों ने कही थी ऐसी बात

मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान केंद्रीय कैबिनेट तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के अध्यादेश को मंजूरी दे दी थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी उस समय अपना फैसला सुनाते हुए तीन तलाक को असंवैधानिक बताया था। लेकिन उस समय मेघालय के मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने इसको संविधान प्रदत्त धार्मिक आजादी के विपरीत तो कुछ ने इसे मुस्लिम महिलाओं को भविष्य में समानता के अधिकार दिलाने के लिए उचित बताया था।

असम सरकार ने दी पेंशन और कौशल विकास ट्रेनिंग

असम के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री हिमंता विश्व शर्मा ने कहा था कि राज्य सरकार तीन तलाक की पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को पेंशन और कौशल विकास ट्रेनिंग मुहैया कराएगी ताकि वह आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा था कि 'हालांकि कौशल विकास ट्रेनिंग सभी तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगारयोग्य बनाने के लिए दी जाएगी लेकिन मुस्लिम तलाकशुदाओं को ट्रेनिंग के दौरान विशेष सहायता के तौर पर पेंशन भी दी जाएगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि मुस्लिम महिलाओं को अपने पूर्व पति से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती है।'