छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के कोहमेटा में कल हुए नक्सली विस्फोट में शहीद हुए 5 जवानो को कुम्हारपारा के रक्षित केंद्र में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। इस मौके पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, विधायक चंदन कश्यप, बस्तर आईजी पी सुंदर राज, कलेक्टर धर्मेश साहू सहित जिले के आला अधिकारी, आम नागरिक और शहीद जवानों को परिजनों मौजूद थे। 

गॉड ऑफ ऑनर के बाद अधिकारियों और आम नागरिकों ने शहीद जवानों के पार्थिव शरीर को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ चलाये जा रहे ऑपरेशन से नक्सली बौखला गए है और इस तरह की कायराना हरकत को अंजाम दिया है। नक्सलियों को इस कायराना हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। वहीं, पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने कहा की शहीद जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा। 

मंगलवार की शाम नारायणपुर जिले के कोहमेटा और कडेनार के बीच नक्सलियों ने डीआरजी जवानों से भरी बस को बारूदी सुंरग से विस्फोट कर उड़ा दिया, घटना में डीआरजी के 5 जवान शहीद हो गये, जबकि 14 जवान घायल हुये हैं, जिनमे से 7 जवानों को गंभीर हालत में एयर लिफ्ट कर रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल भेजा गया है। अन्य 8 जवानों का इलाज नारायणपुर के अस्पताल में जारी है। 

नक्सली हमले में शहीद जवानों में जय लाल उइके ग्राम-कसावाही (प्रधान आरक्षक), करन देहारी अंतागढ़ (ड्राइवर), सेवक सलाम कांकेर, पवन मंडावी बहीगांव और विजय पटेल नारायणपुर शामिल है। आज घटना स्थल का मुआयना करने तथा जवानों को श्रद्धांजलि देने डीजीपी सहित पुलिस के आला अधिकारी भी नारायणपुर आने वाले थे, मगर हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी के चलते वे नहीं पहुँच पाये। जिले के पल्ली-बारसूर मार्ग पर नक्सलियों द्वारा डीआरजी जवानों से भरी बस को उड़ाने के लिए 50 किलोग्राम से अधिक के विस्फोटक का उपयोग किया था। 

विस्फोट से सड़क पर लगभग 12 फीट चौड़ा व छह फीट गड्डा बन गया है। घायल जवानों के मुताबिक विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि बस सड़क से लगभग 20 फीट ऊपर उछलकर नाले में गिर गयी। इस दौरान बस वहां से गुजर रही 11 केवी की विद्युत लाइन के संपर्क में आ गई, जिसकी वजह से बस में सवार जवानों को करंट का तेज झटका भी लगा। इस घटना से तीन बिजली के खंबे भी टूट गए हैं। पुलिस के मुताबिक आपरेशन में शामिल सभी 90 जवान तीन बसों में सवार होकर आ रहे थे। बसों के बीच लगभग तीन किलोमीटर का गैंप था, दुर्घटना के बाद 10 मिनट बाद ही दूसरी बस घटनास्थल पहुंच गयी। इस दौरान वहां नक्सलियों की मौजूदगी भी थी, लेकिन बस में सवार घायल जवानों के द्वारा तत्काल मोर्चा संभालने के कारण शहीद जवानों के हथियार और अन्य सामान नक्सली लूटने में कामयाब नही हो पाए।