आज के समय में भारत के पास पड़ोसी देश पाकिस्तान समेत कई देशों की तुलना में अत्याधुनिक और ताकतवर हथियार हैं। अब स्वदेशी तकनीकों और हथियारों पर जोर दिया जा रहा है। 2014 से विदेशी हथियारों के आयात में 55 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, 2 साल पहले Stimson Center की रिपोर्ट के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस में एक खबर छपी थी, जिसमें कहा गया था कि भारतीय मिलिट्री के 86 फीसदी उपकरणों का सीधा संबंध रूस से है। अब आपको बतातें हैं कि रूस की मदद से बने या मिले भारत के सबसे खतरनाक हथियार...

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ब्रह्मोस मिसाइल

भारत ही नहीं, दुनिया की सबसे खतरनाक और घातक मानी जाती है ये मिसाइल। यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसके कई वैरिएंट्स भारत की तीनों सेनाओं में तैनात हैं। 3000 किलोग्राम वजनी यह मिसाइल 8।4 मीटर लंबी है। यह 200 से 300 किलोग्राम वजन का पारंपरिक, सेमी-आर्मर पीयर्सिंग और परमाणु हथियार ले जा सकती है। अलग-अलग वैरिएंट्स 400 से लेकर 700 किलोमीटर रेंज तक की हैं। इसकी सबसे खतरनाक बात ये है कि ये जमीन या समुद्र से मात्र 3 से 4 मीटर ऊपर उड़कर जा सकती है। इससे दुश्मन के राडार को इसके आने का पता नहीं चलेगा। दूसरी बात इसकी गति 4939 किलोमीटर प्रतिघंटा है। बीच रास्ते में दिशा बदल सकती है।

एस-400

अक्टूबर 2018 में भारत ने रूस के साथ 5 अरब डॉलर में S-400 एअर डिफेंस सिस्टम खरीदने की डील की थी। ये डील 5 यूनिट खरीदने की थी। S-400 जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। ये 400 किमी दूरी तक टारगेट कर सकती है। इससे लड़ाकू विमान, बॉम्बर्स, क्रूज और बैलेस्टिक मिसाइल के अलावा ड्रोन भी मारे जा सकते हैं।

प्रोजेक्ट 971 परमाणु पनडुब्बी

सोवियत समय की अकूला क्लास परमाणु पनडुब्बी भारतीय नौसेना की ताकत है। 110।3 मीटर लंबी इस पनडुब्बी की गति 19 किलोमीटर प्रतिघंटा सतह पर होती है। पानी के अंदर यह अधिकतम 65 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चल सकती है। यह अधिकतम 600 मीटर की गहराई तक जा सकती है। इसमें 28 टॉरपीडो लगे होते हैं। इसके अलावा तीन सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी तैनात होती हैं।

एके-203 असॉल्ट राइफल्स

भारत ने रूस के साथ AK-203 असॉल्ट राइफल बनाने की डील की है। ये राइफल यूपी के अमेठी में स्थित कोरवा में बनाई जाएगी। इसका काम जल्द ही शुरू होने वाला है। भारत ने ये डील 5 हजार करोड़ में की थी, जिसके तहत 6।01 लाख राइफल भारत में बनेगी, जबकि 70 हजार राइफल रूस से ही आएगी। ये असॉल्ट राइफल सेना और अर्द्धसैनिक बलों को दी जाएगी। ताकि पुरानी इंसास और अन्य पुरानी असॉल्ट राइफलों को बदला जा सके। इसकी गोली 730 मीटर प्रति सेकेंड की गति से निकलती है। 400 से 800 मीटर रेंज है। इसमें 30 से 50 राउंड की मैगजीन लगाई जा सकती है।

एके-630 गन

रूस द्वारा विकसित क्लोज-इन वेपन सिस्टम रोटरी कैनन। यानी घूमने वाली तोप। यह भारत के कई जंगी जहाजों पर लगी हुई है। इसके अलग-अलग वैरिएंट्स हैं जो 1000 किलोग्राम से लेकर 2500 किलोग्राम तक वजनी है। इसमें 2000 राउंड की बेल्ट लगती है। इसके अलग-अलग वैरिएंट्स एक मिनट 4000 से लेकर 10 हजार राउंड्स तक फायर कर सकती है। गोलियां 900 मीटर प्रति सेकेंड की गति से जाती हैं। फायरिंग रेंज 4 से 5 हजार मीटर है। इसकी गोलियां सिर्फ लगकर छेद नहीं करती बल्कि टकराने के बाद विस्फोट करती हैं। राडार और टीवी ऑप्टिकल सिस्टम के आधार पर टारगेट को पहचानता है।

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Mi हेलिकॉप्टर

भारतीय वायुसेना का सबसे भरोसेमंद हेलिकॉप्टर। यह सैनिकों के परिवहन और रेसक्यू मिशन में काफी ज्यादा मददगार साबित हुआ है। इसे दुनिया के करीब 60 देश उपयोग करते हैं। साल 2007 से अब तक 12 हजार हेलिकॉप्टर बनाए जा चुके हैं। इसमें 3 क्रू होते हैं। यह 24 सैनिक, 12 स्ट्रेचर या 4 हजार किलोग्राम वजन उठाकर उड़ सकता है। 18।46 मीटर लंबे इस हेलिकॉप्टर की अधिकतम गति 280 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह एक बार में 800 किलोमीटर उड़ सकता है। यह अधिकतम 6 हजार मीटर की ऊंचाई तक जा सकता है। इसमें छह हार्ड प्वाइंट्स लगे हैं। यूपीके-23-250 गन लगी होती है।

AN-32 कार्गो प्लेन

रूस का बनाया एंतोनोव एन-32 कार्गो प्लेन का उपयोग भारतीय वायुसेना कई वर्षों से कर रही है। भारत ने रूस से ऐसे 125 कार्गो प्लेन खरीदे थे। जिनमें से 105 अब भी काम कर रहे हैं। पूरी की पूरी फ्लीट को अत्याधुनिक बनाया जा रहा है। इस प्लेन में चार क्रू लगते हैं। यह 50 पैसेंजर या 6700 किलोग्राम वजन लेकर उड़ सकता है। 23।78 मीटर लंबे इस प्लेन की अधिकतम गति 530 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह एक बार में 2500 किलोमीटर उड़ सकता है। अगर इसमें आधा वजन रखा गया है तो। यह अधिकतम 9500 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।

सुखोई-30एमकेआई

रूस की तरफ से भारत को मिला एक और दमदार फाइटर जेट। जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने अत्याधुनिक बनाया है। भारतीय वायुसेना में ऐसे 272 विमान मौजूद हैं। इसे उड़ाने के लिए दो पायलट लगते हैं। 21।93 मीटर लबें फाइटर जेट की अधिकतम गति 2120 किलोमीटर प्रतिघंटा है। युद्ध के दौरान यह पूरे हथियार के साथ 3000 किलोमीटर तक लगातार उड़ान भर सकता है। आमतौर पर यह 8000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। यह अधिकतम 17,300 मीटर की ऊंचाई तक जा सकता है। इसमें 12 हार्ड प्वाइंट्स हैं, जिनमें रॉकेट्स, मिसाइल और बम या फिर इनका मिश्रण बनाकर लगाया जा सकता है। यह राफेल के साथ मिलकर किसी भी युद्ध में कहर बरपा सकता है।

MiG-29 फाइटर जेट

भारतीय वायुसेना के सबसे घातक लड़ाकू विमानों में से एक मिग-29 मिकोयान (MiG-29 Mikoyan) को रूस ने ही बनाया था। फिलहाल इसके तीन वैरिएंट्स मौजूद हैं। भारत को कई युद्धों में यह विजय दिला चुका है। इसे सिर्फ एक पायलट उड़ाता है। 17।32 मीटर लंबे इस फाइटर जेट में 3500 किलोग्राम फ्यूल आता है। इसकी अधिकतम गति 2400 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह एक बार में 2100 किलोमीटर की ऊड़ान भर सकता है। अधिकतम 18 हजार मीटर की ऊंचाई तक जा सकता है। इसमें 7 हार्डप्वाइंट्स हैं। जिसमें रॉकेट्स, मिसाइल और बम लगाए जा सकते हैं।

बीएमपी-2

यह एक इन्फैन्ट्री फाइटिंग व्हीकल है। 14।3 टन का यह बख्तरबंद वाहन 1।3 इंच मोटी धातु की परत से ढंका रहता है। इसमें 30 मिमी का ऑटोकैनन लगा होता है। इसके अलावा 9M113 कॉन्कर्स एटीजीएम लगा होता है। इसके अलावा इसके ऊपर 7।62 मिमी की मशीन गन लगी होती है। सड़क पर इसकी अधिकतम गति  65 किलोमीटर प्रतिघंटा, ऑफ-रोड 45 किलोमीटर प्रतिघंटा और पानी में 7 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है।

टी-90 टैंक्स

टी-90 टैंक रूस का मुख्य युद्धक टैंक है, जिसे भारत ने अपने हिसाब से बदलकर उसका नाम भीष्म रख दिया है। 2078 टैंक सेवा में है। 464 का ऑर्डर दिया गया है। भारत ने रूस के साथ डील किया है कि वह 2025 तक 1657 भीष्म को ड्यूटी पर तैनात कर देगा। इस टैंक में तीन लोग ही बैठते हैं। यह 125 मिलिमीटर स्मूथबोर गन है। इस टैंक पर 43 गोले स्टोर किए जा सकते हैं। यह 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चल सकता है। इसकी ऑपरेशनल रेंज 550 किलोमीटर है। इस टैंक के रूसी वर्जन का उपयोग कई देशों में किया जा रहा है। इस टैंक ने दागेस्तान के युद्ध, सीरियन नागरिक संघर्ष, डोनाबास में युद्ध, 2020 में हुए नागोमो-काराबख संघर्ष और इस साल यूक्रेन में हो रहे रूसी घुसपैठ में काफी ज्यादा मदद की है।