सरकार की कथित राष्ट्र विरोधी और जन विरोधी आर्थिक नीतियों के खिलाफ वाम समर्थक केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने कल साल के पहले 'भारत बंद' का आह्वान किया है जिसमें 25 करोड़ लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) का कहना है कि सरकारी कंपनियों और बैंकों का निजीकरण रोकने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने, सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा उदारीकरण तथा सुधार संबंधी आर्थिक नीतियों पर सरकार के साथ बातचीत विफल होने पर आठ जनवरी को राष्ट्र व्यापी हड़ताल 'भारत बंद' का आयोजन किया है।


इन संगठनों में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिन्द मजदूर सभा, सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियंस, ऑल इंडिया यूनाईटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, ट्रेड यूनियन कार्डिनेशन सेंटर, सेल्फ इम्प्लॉयड वीमेंस एसोसियेशन, ऑल इंडिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन और यूनाईटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस से जुड़े श्रमिक संघ हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने 'भारत बंद' का समर्थन नहीं किया है।


श्रमिक संघों का कहना है कि 'भारत बंद' के दौरान देश के प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्र में धरने प्रदर्शन किये जाएगें और जन सभायें आयोजित होगीं। हालांकि चिकित्सा, खाद्य पदार्थों, अग्नि सेवा तथा जलापूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया है। इसके अलावा श्रमिक संघों का कहना है कि कल स्कूल, कॉलेज तथा अन्य शैक्षिक संस्थान बंद रहेंगे। सार्वजनिक बैंकों में भी कामकाज नहीं होने की बात श्रमिक संघों ने कही है। उन्होंने कहा कि भारत बंद में विभिन्न उद्योग क्षेत्रों और समाज के विभिन्न तबकों के तकरीबन 25 करोड़ लोग भाग लेंगे।