टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो यानी भाला फेंक की प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर एथलेटिक्स में भारत के 100 साल से भी लंब समय का सूखा खत्म कर दिया। ओलंपिक में 87.58 मीटर की दूरी पर भाला फेंक कर इतिहास रचने वाले नीरज चोपड़ा गोलगप्पे के बेहद शौकीन हैं। उनका मानना है कि गोलगप्पे से एथलीट को नुकसान नहीं होता।

साल 2018 के कॉमनवेल्थ चैंपियन रहे नीरज ने ईएसपीएन को दिए इंटरव्यू के दौरान अपनी इस पसंद के बारे में बताया। 23 वर्षीय नीरज ने बताया कि क्यों कभी-कभी गोलगप्पे खाने से कोई नुकसान नहीं होता।

नीरज ने कहा, 'मुझे लगता है गोलगप्पे खाने में कोई नुकसान नहीं है। गोलगप्पे में ज्यादा पानी ही होता है और आपका पेट पानी से भर जाता है। पापड़ी बड़ी होती है लेकिन उसमें आटा बेहद कम होता है। गोलगप्पे खाने से आपके शरीर में पानी ही जाता है।'

हालांकि, नीरज ने यह भी कहा कि वह रोज गोलगप्पे खाने के लिए नहीं कह रहे हैं। लेकिन कभी-कभी एथलीट गोलगप्पे खा सकते हैं।

गोलगप्पे के अलावा नीरज अपनी मां के हाथ के बने चूरमा के लिए डाइट से समझौता कर लेते हैं। नीरज की मां ने भी शनिवार को कहा था कि वह अपने बेटे के वापस आने का इंतजार कर रही हैं ताकि उन्हें उनका पसंदीदा चूरमा बनाकर खिला सकें।

नीरज की बहन ने बताया कि उनके भाई को मिठाई पसंद है लेकिन उन्होंने ओलंपिक के 6 महीने पहले से ही मीठा खाना तक छोड़ दिया था।