देश में कोरोना वायरस के कारण मुस्लिम समुदाय को काफि कुछ झेलना पड़ रहा है। लेकिन इसी बीच तमाम त्योहारों में से एक त्योहार शब-ए-बारात है। जैसे की हम जानते है कि इस्लाम में इस त्योहार की काफी अहमियत है। इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से आठवां यानी शाबान के महीने की 15वीं तारीख की रात में शब-ए-बारात मनाई जाती है, जो कि देश भर में मनाई जा रही है। जनकारी के लिए बता दें कि मगरिब की अजान होने के साथ शब-ए-बारात की शुरुआत होगी और शुक्रवार को शाबान का रोजा भी रखा जाएगा।


बता दें कि शब-ए-बारात के त्यौहार के दिन पड़ने वाली रात की काफी अहमियत है। शब-ए-बारात मुसलमान समुदाय के लिए इबादत,फजीलत, रहमत और मगफिरत की रात मानी जाती है। इसीलिए मुस्लिम समुदाय के लोग रात भर इबादत करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। ताकी जो भी इन लोगों ने गुनाहा किए हैं उनको खुदा माफी दे दें। इस बात की जानकारी दे देते हुए इमाम मौलाना खुर्शीद आलम बताते हैं कि आमतौर पर लोग शब-ए-बारात कहते हैं, लेकिन सही मायने में इसे शब-ए-बराअत कहा जाना चाहिए।

पहला शब्द 'शब' का मायने रात है, दूसरा बराअत है जो दो शब्दों से मिलकर बना है, यहां 'बरा' का मतलब बरी किए जाने से है और 'अत' का अता किए जाने से, यानी यह (जहन्नुम से) बरी किए जाने या छुटकारे की रात होती है। इनमें ईद की रात, बकरीद की रात, मेअराज की रात, रमजान में शबे कद्र और पांचवीं रात शब-ए-बारात है। इस रात को लोगों पर अल्लाह की रहमतें बरसती हैं। इसीलिए मुस्लिम समुदाय के लोग रात भर जागकर नमाज और कुरान पढ़ते हैं।