अमेरिका की सबसे बड़ी फ्यूल पाइपलाइन कॉलोनियल पाइपलाइन पर साइबर अटैक हुआ है। देश के पूर्वी तट के लिए 45 फीसदी डीजल, पेट्रोल और जेट फ्यूल की सप्लाई इसी पाइपलाइन के जरिए होती है। इस 8850 किमी लंबी पाइपलाइन से रोजाना 25 लाख बैरल फ्यूल की आपूर्ति होती है। इससे दुनियाभर में तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।

इंडिपेंडेंट ऑयल मार्केट एनालिस्ट गौरव शर्मा के मुताबिक टैक्सस की रिफाइनरियों में बड़ी मात्रा में तेल फंसा हुआ है। अगर मंगलवार तक स्थिति सामान्य नहीं हुई तो बड़ा संकट पैदा हो सकता है। माना जा रहा है कि इस घटना का असर भारत पर भी होगा और पेट्रोल-डीजल की कीमत के साथ-साथ गैस की कीमत में उछाल आ सकती है। इस साइबर अटैक के बाद सोमवार को ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत में तेजी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि डब्ल्यूटीआई क्रूड 68 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। कच्चे तेल की कीमत में एक डॉलर की तेजी से भारत में पेट्रोल की कीमत 55 पैसे प्रति लीटर और डीजल 60 पैसा प्रति लीटर बढ़ जाती है।

इधर देश में सोमवार को सरकारी तेल कंपनियों ने फिर पेट्रोल और डीजल, दोनों ईंधनों के दाम में भारी तेजी कर दी। पेट्रोल में जहां प्रति लीटर 26 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, वहीं डीजल के दाम में 33 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को दिल्ली के बाजार में पेट्रोल 91.53 रुपए प्रति लीटर पर चला गया और डीजल 82.06 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपए के पार चली गई है। डब्ल्यूटीआई बेंचमार्क वाला तेल अमेरिकी तेल के कुओं से निकाला जाता है। इसे पाइपलाइन के माध्यम से ट्रांसपोर्ट किया जाता है। अमेरिका में एक स्टेट है ओक्लाहोमा। इस तेल को इसी जगह पर स्टोर किया जाता है। इसका प्रयोग कम सल्फर वाली गैसोलीन और कम सल्फर वाला डीजल बनाने में किया जाता है।

दुनिया भर में रोज करीब 924 लाख बैरल क्रूड ऑयल की खपत होती है। भारत में रोजाना करीब 35 लाख बैरल क्रूड ऑयल की खपत होती है और भारत इसका 83 प्रतिशत आयात करता है। भारत जिस कच्चे तेल का आयात किया जाता है, वह ब्रेंट क्रूड है, क्योंकि भारत मुख्यत: गल्फ देशों से तेल आयात करता है, जहां पर कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट ही होता है।