आज की दिन वाकई काफी महत्वपूर्ण हैं। आज अमावस्य और इसी के साथ अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट सावित्री व्रत भी है जो कि हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्रती (महिला) सच्चे मन से इस व्रत को करती हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस व्रत में पूजन, विधि, नियम, कथा के कुछ नियम हैं जिनका पालन करना काफी अहम होता है।

वट सावित्री की पूजा करने के लिए पूजन सामग्री में सबसे पहले माता सावित्री की मूर्ति, बांस का पंखा, बरगद पेड़, लाल धागा, कलश, मिट्टी का दीपक, रोली, चढ़ावे के लिए पकवान, अक्षत, मौसमी फल, पूजा के लिए लाल कपड़े, सिंदूर-कुमकुम और हल्दी, सोलह श्रृंगार व पीतल का पात्र जल अभिषेक के लिए पूजन जगह पर रखें। जानकारी के लिए बता दें कि व्रत मुहूर्त कल 9 बजकर 35 मिनट से शुरू हो चुका है और आज रात 11 बजकर 8 मिनट पर यह खत्म हो जाएगा।


ऐसे करें पूजाः
वट मतलब की बरगद का पेड़ इस व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। इसके साथ-साथ यमराज की पूजा करते हैं। इसमें पहले  महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। फिर बांस की एक टोकरी में पूजा की सभी सामग्रियां रखकर वट वृक्ष की पूजा करें। वट की जड़ को जल का अर्घ्य दें और सोलह श्रृंगार अर्पित करें और फिर जल, फूल, रोली-मौली, कच्चा सूत, भीगा चना, गुड़ इत्यादि चढ़ाएं और जलाभिषेक करें।


ये सब करने के बाद पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा लपेट कर तीन बार परिक्रमा करें। इसके बाद वट सावित्री व्रत की कथा सुनें। और भीगे हुए चने का बायना निकाले और उसपर कुछ रूपए रखकर अपनी सास को दे दें। अंत में पूजा की समाप्ति के पश्चात ब्राह्मणों फल आदि दान करें। और प्रणाम करें।