पूर्वोत्तर में बाघों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है। अवैध शिकार पर रोक के कानून का ठीक से क्रियान्वयन न होने की वजह से बाघों के संरक्षण में आशा अनुरुप परिणाम देखने को नहीं मिल रहे हैं। नागालैंड और मिजोरम जैसे राज्यों में बाघों की संख्या को लेकर स्थिति काफी गंभीर है। 

अरुणाचल में बाघों की संख्या में हुई मामूली बढ़ोतरी

एक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि अरुणाचल प्रदेश में भी बाघों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है। भारत में बाघों की स्थिति बताने वाली 2018 की एक रिपोर्ट में पूर्वोत्तर में उनके संरक्षण के लिए तत्काल प्रयास करने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व के पार्क में एक भी बाघ नहीं बचा है। वहीं अरुणाचल प्रदेश में साल 2014 से लेकर अब तक सिर्फ एक बाघ की बढ़ोतरी देखी गई है। यहां बाघों की कुल संख्या 29 है। 

अवैध शिकार के खिलाफ बने कानून का ठीक से नहीं हो रहा क्रियान्वन

रिपोर्ट में पूर्वोत्तर की पहाडिय़ों को बाघों की संख्या के मामले में सबसे कमजोर श्रेणी में रखा गया है और यहां बाघों के तत्काल संरक्षण की कोशिश की बात कही गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध शिकार के खिलाफ बने कठोर कानून के समुचित क्रियान्वन के अभाव की वजह से पूर्वोत्तर की पहाडिय़ों में बाघों की संख्या में कमी आ रही है। नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी(एनटीसीए) प्रभावी प्रबंधन के मूल्यांकन(एमईई) में अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम को फेयर कैटेगरी में रखा गया है। 

अरुणाचल प्रदेश में तीन टाइगर रिजर्व हैं। ये हैं नामडाफा, कामलांग और पाक्के। इनमें नामडाफा और कामलांग को फेयर कैटेगरी में रखा गया है वहीं पाक्के को गुड श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है। इसके अलावा मिजोरम के डाम्पा टाइगर रिजर्व को भी फेयर श्रेणी में रखा गया है। एमईई की रिपोर्ट टाइगर रिजव्र्स के हेल्थ का मूल्यांकन करती है और यह भी बताती है कि वहां बाघों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की स्थिति क्या है।