मंगलदै । राज्य के अन्य भागों  की तरह दरंग  जिले में आई भीषण बाढ़  से बर्बादी का नजारा अब सामने आ रहा है। मक्के के अच्छे उत्पादन होने को लेकर खुश हो रहे किसानों के मत्थे पर अचानक आई  बाढ़ ने बर्बाद की कहानी लिख कर चली गई । 

पूर्वी दरंग के हजारों बीघा  खेत में मक्के  की खेती बर्बाद हो गई। फसल काटने से ठीक पहले अचानक बाढ़  आ जाने के कारण मकई की बाली सड़ गई और उसमें घास उग आए हैं।

इस  संबंध में चेरेंग चापरी के एक किसान वरुण दास ने बताया कि एक बीघा खेत में 11-12 विबंटल मक्के का उत्पादन होता है और खर्च के हिसाब से बीज, खाद सिचाई, मज़दूरी, रख-रखाव और यातायात से करीब 5 हजार रुपए खर्च होता है, जबकि थोक बाजार भाव में किसानों को करीब पंद्रह हजार रुपए मूल्य का उत्पादन होता है।

 इस तरह एक बीघा खेत में किसानों को करीब 10 हजार रुपए का मुनाफा होता है। साथ ही कहा कि उसने 12  बीघा खेत में मक्के  की खेती की थी । जंहा से उसे करीब एक लाख बीस हजार रुपए मुनाफा होना था,  लेकिन बाढ़  ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया  और आज उसका पूरा मकई खेत में सड़ गया जिसके कारण वह आर्थिक बदहाली से गुज़र रहा है। 

एक तरह उसे आगामी सीजन तक परिवार के पेट पालने की समस्या है तो  दूसरी तरफ कर्ज चुकाना है । उसने कृषि विभाग से सहायता की अपील की  और कहा कि अगर मुसीबत की इस घड़ी  में अगर सरकार ने मदद नहीं की  तो किसानों की कमर टूट जाएगी। इसी तरह मोवामारी, मागुरमारी, अारीमारी, सामपुर, बदलीचर  सहित ब्रह्मपुत्र के चर स्थित दर्जनों गांवों में अधिकांश किसान मक्के  की खेती करते है लेकिन इस बार की प्रलयंकारी बाढ़  से किसानों के सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है । 

इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी भगवान चंद्र भराली  ने कहा कि कृषि विभाग किसानों की फसलों के नुकसान का आकलन कर रहा है और नुकसान का आकलन करने के बाद सरकार के पास रिपोर्ट भेजी जाएगी।  और सरकारी निर्देश  के अनुसार किसानों को नुकसान  का मुआवजा दिया जाएगा।