पूर्व केन्द्रीय मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद का कहना है कि कांग्रेस छोड़कर जाने वालों की फिर से पार्टी में कोई जगह नहीं है क्योंकि उन्होंने सिर्फ निजी लाभ के लिए पार्टी छोड़ी है। शिलॉन्ग में एक मीटिंग के दौरान खुर्शीद ने यह बात कही थी। खुर्शीद ने कहा था कि कुछ सदस्यों को जो डिजर्व करते थे उससे ज्यादा दिया गया लेकिन उन्होंने खुद के फायदे के लिए पार्टी छोड़ दी। दोबारा उनका स्वागत नहीं होगा।

मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष ओकराम इबोबी सिंह ने इसकी जानकारी दी। इबोबी सिंह का कहना है कि कांग्रेस छोड़कर जाने वालों के लिए अब वापस पार्टी में आना आसान नहीं है क्योंकि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं ने अपना रूख कड़ा कर लिया है। इबोबी सिंह ने कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ जानकारी दी कि पार्टी के जो 6 विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं, उनके आगामी विधानसभा चुनाव में जीतने का कोई चांस नहीं है। सभी 6 विधायकों को मंत्री पद नहीं दिया गया। इबोबी सिंह व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता इससे खुश हूं।

हालांकि कांग्रेस ने उनको अयोग्य ठहराने संबंधी याचिका के लिए विधानसभा अध्यक्ष वाई.खेमचंद से संपर्क नहीं किया है। इबोबी सिंह ने शनिवार को कहा कि टैक्टिकल मूव के तहत अभी तक उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं की गई है। हालांकि वन मंत्री. टी.श्यामकुमार को अयोग्य ठहराने में हो रही अत्यधिक देरी के खिलाफ हम हाईकोर्ट गए। श्यामकुमार विधायक पद की शपथ लेने से पहले ही भाजपा में शामिल हो गए थे। इबोबी सिंह ने कहा, हमें उम्मीद है कि हाईकोर्ट जरूरी कदम उठाएगी।

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस विधायकों ने टैक्टिक अंडरस्टैंडिंग के तहत पाला बदला था कि वे मंत्री बन जाएंगे। हालांकि 15 मार्च को शपथ लेने वाली भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में चीजें अच्छे से नहीं चल रही है। स्वास्थ्य मंत्री एल.जयंताकुमार ने इस्तीफा सौंप दिया था लेकिन बाद में वापस ले लिया। 12 में से 6 संसदीय सचिवों ने कथित रूप से इस्तीफा दे दिया है। मंत्री जिस तरीके से उन्हें बाईपास कर रहे हैं उससे वे नाराज हैं। मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह ने कहा, उन्होंने वैकल्पिक इंतजामों के लिए इस्तीफे दिए हैं।

भाजपा में शामिल होने वाले कांग्रेस के 6 विधायकों पर मुख्यमंत्री ने कहा, मंत्री पद देने जैसे कोई सौदेबाजी नहीं हुई थी। उन्होंने पता था कि सरकार ने जिस तरह से अच्छे विकास कार्य किए हैं उससे अगले चुनावों में उनके फिर से चुने जाने का अच्छा चांस है। यही उनके भाजपा में शामिल होने की एक मात्र वजह है। हालांकि इबोबी सिंह का कहना है कि राज्य सरकार ने कुछ भी नया नहीं किया है। सरकार ने सिर्फ यही किया है कि कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई योजनाओं के नाम बदल दिए। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 28 विधायक चुनकर आए थे,जबकि भाजपा के 21 लेकिन अन्य दलों से हाथ मिलाने से भाजपा ने 32 का समर्थन प्राप्त कर लिया। इसके बाद राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने बीरेन सिंह को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। इबोबी सिंह का कहना है कि सबसे बड़े दल के नाते राज्यपाल को मुझे सरकार बनाने का चांस देना चाहिए था।