देश में बीजेपी का राज चल रहा है लेकिन शासन सत्ता होने के बाद भी देश के कई राज्यों में बीजेपी की सरकार नहीं है। कंग्रेस को हर जगह से पटखनी देने के बाद बीजेपी हर जगह पर अपनी जड़े मजबूत करना चाह रही है। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। भाजपा के लिए तीन राज्य सबसे मुश्किल बने हुए हैं वो हैं- पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु।
बता दें कि इन तीनों राज्यों के समीकरण भाजपा के अनुरूप नहीं बैठ पा रहे हैं और उसके केंद्रीय नेतृत्व की भी बड़ी स्वीकार्यता इन राज्यों में नहीं बन पा रही है। इन राज्यों के लिए पार्टी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ मिलकर नई रणनीति बना रही है, ताकि आने वाले सालों में यहां पर अपनी जड़ें मजबूत की जा सकें। भाजपा ने पूर्वोत्तर के राज्यों से तो कांग्रेस को सत्ता से पूरी तरह बेदखल कर दिया है और अधिकांश राज्यों में वह खुद या उसके सहयोगी सत्ता में है।
जैसे कि हम जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर में उसने अपनी पकड़ मजबूत रखी है। पहले पीडीपी के साथ मिलकर सत्ता हासिल की और अब अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद बने दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में वह लगातार मजबूत भी हो रही है। इसी के साथ तेलंगाना में भी पार्टी काफी तेजी से अपनी जड़े जमा रही है। केरल में सत्ता की स्थिति कमजोर नहीं होने दे रही है।


तमिलनाडु - तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जहां पर उसके केंद्रीय नेतृत्व काम नहीं कर पा रहा है। राज्य इकाई भी अन्य दलों की तुलना में काफी पीछे है। बीजेपी किसी न किसी एक प्रमुख द्रविड़ दल के भरोसे ही चल पा रही है। हालांकि पार्टी ने वहां पर नई रणनीति पर काम करना शुरू किया है।

पंजाब - पंजाब में लंबे समय से अकाली दल के साथ छोटे भाई की भूमिका में रहने के चलते भाजपा अपना राज्य में विस्तार नहीं कर पाई है। अभी यह नहीं कह सकता है कि भावी पंजाब विधानसभा में उसकी उपस्थिति कितनी होगी? पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि वह 2024 के मद्देनजर कुछ क्षेत्रों के लिए अपनी खास रणनीति पर काम कर रही है।

आंध्र - आंध्र प्रदेश में भाजपा को स्थानीय जगह नहीं मिल पाई है। केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे यहां पर पार्टी का राज्य संगठन बहुत कामयाब नहीं हो पाया है।