जमशेदपुर पश्चिमी सीट पर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि के बाद चुनावी तस्वीर साफ है। वर्तमान विधायक और मंत्री रहे सरयू राय इस सीट से चुनाव नहीं लड़ रहे है। ऐसे में सीधा मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी बन्ना गुप्ता व भाजपा के देवेन्द्र सिंह के बीच है। सरयू राय बिना चुनाव लड़े इस सीट की चुनावी गणित को प्रभावित करने का दम रखते हैं। दल में भितरघात से भाजपा का नुकसान हाे सकता है।

 
सीएम रघुवर दास व मंत्री सरयू राय के बीच राजनीतिक दूरी के कारण दाेनाें विधानसभा के संगठन पर दोनों की अपनी अलग पकड़ है। जमशेदपुर पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता पूरी तरह सरयू राय के समर्थक है। इसका एहसास उनके समर्थकों ने विधानसभा चुनाव की बैठक में करा दिया था। ऐसे में अब सरयू के नहीं लड़ने पर भाजपा के घोषित प्रत्याशी देवेन्द्र सिंह के पक्ष में सरयू समर्थक कितनी ईमानदारी से काम करेंगे यह कहना मुश्किल है।


20 वर्षों से जमशेदपुर पश्चिम की जनता किसी भी विधायक दोबारा जीत का सेहरा नहीं पहना रही है। वर्ष 2000 में भाजपा प्रत्याशी मृगेन्द्र प्रताप सिंह क्षेत्र के विधायक रहे थे, उनका टिकट काटकर 2005 में भाजपा ने सरयू राय को चुनाव लड़ाया। सरयू राय ने निकटतम प्रतिद्वंदी बन्ना गुप्ता को लगभग 13 हजार वोट से चुनाव में मात दी। इसके बाद 2009 में बन्ना गुप्ता ने सरयू राय को 3,300 वोट से पटखनी दी। 2014 में एक बार फिर आमने-सामने सरयू राय और बन्ना गुप्ता ही थे, इस बार सरयू राय ने बन्ना गुप्ता को लगभग 10,500 वोट से हरा दिया था।