स्मार्टफोन के ज़माने में आखिर चिट्ठियाँ कौन भेजता होगा? यह सवाल कभी न कभी आपके मन में भी जरूर आया होगा। लेकिन हमारे देश में आज भी ऐसी कई जगह हैं, जहां इस आधुनिक ज़माने में चिट्ठी ही अपनों का हालचाल जानने या फिर कोई सूचना देने का प्रमुख साधन है। जी हाँ, यह सच है। जहाँ हम चंद मैसेज या कॉल आदि के माध्यम से अपने परिजनों और मित्रों तक अपनी बात मिनटों में पहुँचा सकते हैं, अभी भी कुछ जगह ऐसी हैं, जहां संपर्क के लिए लोगों द्वारा कई बार छह महीने से भी अधिक समय तक का लंबा इंतजार करना सबसे बड़ी मजबूरियों में से एक है। ठीक ऐसा ही एक डाकघर हिमाचल के खूबसूरत पहाड़ों की गोद में दशकों से फल-फूल रहा है।

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तमाम उलझनों से परे, एक बात जो इस डाकघर को विशेष बनाती है, वह है इसकी इकलौती खासियत। यह खूबी इलाके में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में कहीं और नहीं है। हिमाचल प्रदेश के स्पीति में हिक्किम नामक गाँव में स्थित यह डाकघर दुनिया का सबसे ऊँचाई पर बना डाकघर है। इसमें लाहौल और स्पीति दो अलग-अलग जिले शामिल हैं। यह तिब्बत की सीमा पर है। समुद्र तल से 14567 फीट यानी 4440 मीटर की ऊँचाई, जहाँ साँस लेने में भी काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है, ऐसी मुश्किल जगह पर स्थित यह डाकघर सन 1983 से दूर-दराज के दुर्गम गाँवों तक चिट्ठियाँ पहुंचा रहा है।

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इस डाकघर की अद्भुत विशेषता को संचार मंत्रालय के राज्य मंत्री देवुसिंह चौहान ने स्वदेशी सोशल मीडिया मंच कू ऐप के अपने हैंडल के माध्यम से बड़ी ही खूबसूरती से दर्शाया है। उन्होंने 'आपका दोस्त इंडिया पोस्ट' का बड़ा ही खूबसूरत हैशटैग इस्तेमाल करते हुए कहा है:

आपकी सेवा में हाज़िर, विश्व का सबसे ऊँचाई पर स्थित हिक्किम डाकघर।

#ApkaDostIndiaPost

आज डाक सेवा से करीब 150 देश जुड़े हुए हैं। भारतीय डाक सेवा दुनिया की सबसे बड़ी डाक सेवा है। देश में इसके ऑफिस हर शहर और तहसील में हैं। भारतीय डाक के नाम पर एक और रिकॉर्ड यह है कि दुनिया में सबसे ऊँचाई पर स्थित डाकघर हमारे भारत में ही है, जो कि हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों के आकर्षण का एक बड़ा हिस्सा है।

केवल छह महीनों के लिए खुलता है

हिक्किम के आसपास के गाँवों में संचार का एकमात्र साधन चिट्ठियाँ ही हैं। इस उप डाकघर के जिम्मे हिक्किम के अलावा लांगचा-1, लांगचा-2 और कॉमिक गाँवों में चिट्ठियाँ पहुँचाना है। स्पीति के रास्ते साल में महज कुछ महीनों तक ही खुलते हैं। बर्फ पिघलने के बाद जून से अक्टूबर तक ही यहाँ आना संभव हो पाता है। बाकी महीनों में तो यहाँ बर्फ जमी रहती है। हर साल जून से अक्टूबर तक खुले रहने वाला यह पोस्ट ऑफिस एक किराए के मकान में चलता है।

यह पोस्ट ऑफिस आसपास के कई गाँवों के लोगों को बाकी दुनिया से जोड़ता है। यह एक ऐसी जगह है, जहाँ मोबाइल और इंटरनेट सुविधा भी नहीं पहुँच पाती, लेकिन हमारा भारतीय डाकघर इस जगह को दुनिया से जोड़ने वाली एकमात्र कड़ी है।

मोहर भी है अनूठी

यह एक ऐसा अनोखा पोस्ट ऑफिस है, जहाँ लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके पहुँचते हैं। दुनिया के सबसे अधिक ऊँचाई पर बने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले का हिक्किम पोस्ट ऑफिस न सिर्फ ऊँचाई पर बसे होने के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इस पोस्ट ऑफिस की चिट्ठियों और डाक टिकटों पर लगने वाली मोहर भी लोगों के लिए खास होती है। इस पोस्ट ऑफिस की मोहर में 'दुनिया के सबसे ऊँचाई पर बसा पोस्ट ऑफिस, हिक्किम' अंकित होता है।

रिंचेन शेरिंग पिछले 39 सालों से संभाले हुए हैं कमान

छोटे तिब्बत के रूप में पहचानी जाने वाली स्पीति घाटी के 14567 फीट पर बसे हिक्किम गाँव और आस-पास के गाँवों लांगजा, चीचम, डेमूल और कौमिक के लोगों के लिए इस पोस्ट ऑफिस को 1983 में खोला गया था। भारतीय डाक विभाग ने इसे लोगों को पत्राचार की सुविधा मुहैया करवाने के लिए खोला था। रिंचेन शेरिंग पिछले 39 सालों से इस डाकखाने के पोस्ट मास्टर हैं। वे तब से इस पोस्ट ऑफिस का संचालन कर रहे हैं, जब इसकी नींव रखी गई थी। लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे दुनिया के विभिन्न कोनों से आने वाले पर्यटकों को दुनिया के सबसे ऊँचाई पर बसे इस पोस्ट ऑफिस के बारे में पता चला, परिणामस्वरूप हर साल यहाँ पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जाने लगी है।