दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने सरकारी स्कूलों की मदद के लिए एक शीघ्र चेतावनी प्रणाली विकसित की है, जिससे किसी छात्र के लंबे समय तक अनुपस्थित रहने पर उचित कदम उठाए जा सकेंगे।

प्रौद्योगिकी आधारित तंत्र छात्रों की उपस्थिति पर नजर रखने में मदद करके पढ़ाई छोड़ने के मामलों को रोकने में सरकारी स्कूलों की सहायता करेगा। साथ ही उच्च जोखिम की स्थिति में बच्चों की सहायता भी करेगा।

डीसीपीसीआर के अध्यक्ष अनुराग कुंडू ने कहा कि यदि कोई बच्चा लगातार सात दिनों से अधिक समय तक अनुपस्थित रहता है या एक महीने में उपस्थिति केवल 30 प्रतिशत है, तो सिस्टम उसके माता-पिता को हिंदी में एसएमएस भेजेगा, जो यह संदेश देगा कि बच्चा स्कूल नहीं आ रहा है और स्कूल में उसका इंतजार किया जा रहा है।

अगले दिन, माता-पिता को एक इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस (आईवीआर) कॉल प्राप्त होगी, जहां एक रिकॉर्ड किया गया संदेश छात्र को स्कूल वापस जाने के लिए प्रेरित करेगा।

तीसरे दिन, माता-पिता को टीचर का फोन आएगा, जिसमें उनसे बच्चे के स्कूल से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने का कारण पूछा जाएगा। कारण जानने के बाद, टीचर पोर्टल में विस्तार से जानकारी देगा।

बच्चे को स्कूल द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी और यदि कोई कारण प्रमुख है, उदाहरण के लिए माता या पिता अथवा दोनों की मृत्यु होने पर डीसीपीसीआर और अन्य निकाय बच्चे की सहायता के लिए आगे आएंगे। कुंडू ने कहा कि उन्होंने अक्टूबर में इस परियोजना पर काम करना शुरू कर दिया था और इसे अप्रैल में शुरू किया जाना था, लेकिन कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने उनकी योजनाओं को टाल दिया।

उन्होंने समझाया कि यदि कोई बच्चा लंबे समय तक अनुपस्थित रहता है, तो यह इस बात का सूचक है कि वे घर पर एक बड़े संकट का सामना कर रहा है जिससे उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह संकट माता-पिता की आय का नुकसान, कम उम्र में शादी, बाल श्रम, माता-पिता की बीमारी, विकलांगता आदि भी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली प्रारंभिक संकेत का पता लगाएगी, जो कि स्कूल से लंबी अवधि की अनुपस्थित है और स्थिति खराब होने से पहले अधिकारियों को इस पर काम करने में मदद करेगी। अब तक दो जिलों के 250 प्राचार्यों ने इस प्रणाली पर एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम चलाया है। सिस्टम फिजिकल क्लासेस पर नजर रखने वाला है।