अपने और सात पीढ़ियों के लिए मोक्ष की चाह में घुघरी के 'भगवान" ने गांव में भव्य मंदिर बनाने का संकल्प लिया है। वे स्वयं तो कच्चे घर में रहते हैं लेकिन चाहते हैं कि उनके और सारे जग के भगवान भव्य मंदिर में ही बिराजें।

संकल्प को पूरा करने मंंदिर के लिए एक बीघा और पुजारी के लिए 6 बीघा जमीन वे दान कर चुके हैं। 21 लाख रुपए की 24 देवताओं की मूर्तियां भी गुरुवार को राजस्थान से गांव में पहुंच गई हैं। 8 से 12 क्विंटल वजनी मूर्तियो को उतारने के लिए 15 सदस्यों की टीम राजस्थान से आई।


यही नहीं इन्हें ट्रक से उतारने के लिए क्रेन भी मंगवानी पड़ी। सभी मूर्तियां गांव की विशेष कुटिया में रखी हैं। उनके दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा है। यहां चर्चा हो रही है घुघरी के भगवानसिंह सक्तावत की। लंबे समय से उनके मन में इच्छा थी कि गांव में महाकाल मंदिर धाम और शनि धाम बने। इसमें नवग्रह देवता और महाकाली माता के साथ 57 देवता विराजें।


इसके लिए उन्होंने फोरलेन की अपनी एक बीघा जमीन मंदिर के लिए दान कर दी। पुजारी के भरण-पोषण के लिए छह बीघा जमीन वे पहले ही दान कर चुके हैं। मंदिर में मूर्तियों की स्थापना के लिए 21 लाख रुपए की घर की पूंजी लेकर वे 600 किमी दूर राजस्थान के मकरानी शहर पहुंचे। वहां से तीन ट्रकों में 24 मूर्तियां लेकर गुरुवार गांव लौटे।


गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने ढोल-ढमाकों और आतिशबाजी के साथ स्वागत किया। मूर्तियों को गांव में विशेष कुटिया में रखा गया है, जहां बिजली और पंखे की व्यवस्था है। मंदिर निर्माण होने तक देवताओं की मूर्तियां इसी कुटियां में रहेंगी। उनका कहना है कि अब जनसहयोग से राशि जुटाकर शीघ्र ही मंदिर निर्माण शुरू करेंगे।
 

गणेशजी, एकलिंगनाथजी शिवलिंग, नंदी, कछुआ, पृथ्वीदेवी, मां महाकाली, महाकाली माता, बाणेश्वरी माता, नागणेचा माता, साडू माता, नौ ग्रह शनि देव, शुक्रदेव, सूर्यदेव, राहुदेव, केतुदेव, मंगलदेव, बुद्धदेव, बृहस्पतिदेव, चंद्रदेव, नागदेव, नागीन माता, बालाजी और शनि देवदायी आदि सहित 24 मूर्तियां लाई गई हैं। सभी मूर्तियां संगमरमर से निर्मित हैं और काफी खूबसूरत भी हैं।
 

भगवान सक्तावत कहते हैं कि वे गरीब परिवार के हैं। गांव में कच्चा घर है। लंबे समय से यह इच्छा थी कि घुघरी में भव्य मंदिर निर्माण हो और मंदिर में 57 देवता विराजें। 24 मूर्तियां तो आ चुकी हैं, 33 मूर्तियां लाएंगे। मंदिर और पुजारी के लिए जमीन दे दी है। उन्होंने बताया कि मंदिर या देवता की किसी भी मूर्ति पर उनका या परिवार के किसी भी सदस्य का नाम नहीं होगा। मंदिर सार्वजनिक होगा और सभी यहां आ सकेंगे। परिवार में 5 सदस्य हैं। यह कदम उन्होंने अपने और सात पीढ़ियों के मोक्ष के लिए उठाया है।