गारो हिल्स के भ्रष्टाचार-रोधी और मानव विकास संगठन ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों की शिकायतों  के मद्देनजर राज्य सरकार को सात दिनों के लिए राहत मंजूर करनी चाहिए। संगठन का मानना था कि बाढ़ का पानी कम रहा है, लेकिन जनता का बहुत नुकसान हुआ है। घर की हालत खराब हुई है। घर में रखे अनाज व अन्य खाद्य सामान नष्ट हो गया है। बाढ़ ने फसल पूरी तरह बर्बाद कर दिया है, संगठन ने अपने बयान में बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकांश लोग मजदूरी कर परिवार की आजीविका चलाते हैं।

बाढ़ के कारण रोजी-रोटी प्रभावित हुआ है। उनका सरकार से आग्रह है कि स्थिति अब भी सामान्य नहीं हुई है। जब तक बाढ़ प्रभावित परिवारों की जिंदगी सही पटरी पर नहीं आ जाती उनलोंगों की मदद की जानी चाहिए, क्योंकि  लोग अभी भी राहत शिविरों में हैं। एसीएचड़ीओ ने बताया कि मैदानी इलाके के लोग दिहाड़ी मजदूर हैं और जब से बाढ़ आई है, वे अपने दैनिक कार्य को पूरा करने में  सक्षम नहीं थे।किसानों का बड़ा नुकसान हुआ है। धान की नर्सरी और मवेशियों को खो दिया है।


इसलिए सरकार को उन्हें मुआवजा देना चाहिए। उक्त एनजीओं कई इलाकों को यात्रा कर देखा है कि बाढ़ के कारण मवेशियों के लिए कोइ चारा नहीं है। लिहाजा सरकार को जानवरों को भी अस्थायी आश्रय देने के बारे में सोचना चाहिए था। संगठन ने सरकार से अपील की कि बाढ़ प्रभावितों की मदद में अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इस बीच संगठन ने सक्षम अनुसार बाढ़ प्रभावित को जरूरी राहत सामग्री दी।