इटावा। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भले ही अब मदरसों मे नियमित राष्ट्रगान की प्राथमिकता रखी हो लेकिन इटावा में एक मदरसा ऐसा भी है जो पिछले दो दशक से पठन पाठन से पहले राष्ट्रगान गवा कर बच्चों में देश भक्ति का जुनून पैदा करने में लगा है। जिला मुख्यालय के निकट पक्का तालाब पर स्थिति दारूल उलम चिश्तिया मदरसे में हर रोज सुबह कक्षायें शुरू होने से पहले स्कूली बच्चे राष्ट्रगान गाते हैं। मदरसा संचालकों के मुताबिक यहां आने वाले बच्चों के लिये राष्ट्रगान दिनचर्या का एक अंग है और ऐसा कर वह खुद को गौरान्वित महसूस करते हैं।

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दारूल उलूम चिश्तिया मदरसा संचालक हाफिज फैजान चिश्ती ने राष्ट्रगान के सरकारी आदेश का स्वागत किया और कहा कि बच्चों को राष्ट्रगान से एक नई ऊर्जा का भी अहसास होता है। सरकार ने यह आदेश अभी जारी किया है लेकिन उनके मदरसे मे बहुत ही पहले से राष्ट्रगान गाया जा रहा है। सरकार ने आदेश देकर साफ कर दिया है कि हर हाल मे पढाई से पहले राष्ट्रगान का किया जाना जरूरी कर दिया गया तो यह बहुत ही अच्छी बात है। सरकार का यह आदेश स्वागत योग्य है। 

उन्होने कहा, जिसको अपने वतन से मोहब्बत होगी उसे आखिर क्यों राष्ट्रगान पढऩे से दिक्कत होगी। हमें राष्ट्रगान पढऩे से फक्र महसूस होता है। राष्ट्रगान से उनके स्टाफ और बच्चों में एक नई ऊर्जा का संचालन होता है। हमारे यहां मदरसों में राष्ट्रगान पहले से गाया जाता रहा है और आगे भी गाया जाता रहेगा। शुक्रवार से प्रदेश के सभी में मदरसों में राष्ट्रगान को गाए जाने को लेकर आदेश किया गया था लेकिन शुक्रवार को जुमे के दिन मदरसों में छुट्टी होने के चलते मदरसे बंद थे जिसके बाद शनिवार को पहले दिन मदरसे खुलने के बाद मदरसा दारुल उलूम चिश्तिया में बच्चों और स्टाफ ने राष्ट्रगान गाकर दिन की शुरुआत की। 

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क्लास केजी से 8 तक चलने वाले मदरसे में अरबी, उर्दू, दीनी इस्लामी तालीम के साथ ही हिंदी, अंग्रेजी, मैथ, साइंस, कंप्यूटर, के साथ ही अन्य विषयों की शिक्षा दी जाती है। इस मदरसे में इस समय 80 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है। मदरसे की एक शिक्षिका का कहना है कि उनके मदरसे मे राष्ट्रगान को प्राथमिकता और वरीयता के साथ काफी पहले से गाया जाता रहा है। इस मदरसे में अरबी, उर्दू, दीनी इस्लामी तालीम के साथ ही हिंदी, अंग्रेजी, मैथ, साइंस, कंप्यूटर, के साथ ही अन्य विषयों की शिक्षा प्रमुखता से दी जाती है।