नागरिकता संशोधन बिल को लेकर संसद से सड़क तक हंगामा मचा हुआ है। सोमवार को यह बिल लोकसभा में पास हो गया और अब इसे राज्य सभा में पेश किया जाएगा। बिल के विरोध में असम की सड़कों पर लोगों का गुस्सा देखने को मिला। असम के अलावा त्रिपुरा में इस बिल को लेकर कड़ा विरोध हो रहा है।


इस मुद्दे पर असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा कि ये बिल असंवैधानिक है, बांटने की राजनीति पर आधारित है। इसके साथ ही उन्होंने इस को आरएसएस का एजेंडा करार दे दिया है। उन्होंने इस बिल के विरोध में भाजपा सरकार और आरएसएस पर तल्ख टिप्पणी की है।


त्रिपुरा में जहां नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) के खिलाफ प्रदर्शनों को लेकर मंगलवार दोपहर दो बजे से 48 घंटों के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। आधिकारिक अधिसूचना में यह बात कही गई है। अधिसूचना में कहा गया है कि सभी मोबाइल सेवा प्रदाताओं को एसएमएस संदेशों पर भी पाबंदी लगाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। यह कदम अफवाह फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है। राज्य के गृह विभाग की इस अधिसूचना पर त्रिपुरा सरकार के अतिरिक्त सचिव एके भट्टाचार्य के हस्ताक्षर हैं।


वहीं असम में भी इस बिल को लेकर भारी विरोध जारी है। असम में विधेयक के विरोध में वामपंथी विचारधारा वाले करीब 16 संगठनों ने मंगलवार को सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक 12 घंटे का बंद का आह्वान किया था। जिसमें नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (NESO) और ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (AASU) सहित कुल 16 संगठन हैं।

लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया है, लेकिन राज्यसभा में इस बिल को बुधवार को पेश किया जाएगा। बुधवार दोपहर दो बजे से इस बिल पर ऊपरी सदन में बहस शुरू होगी। बिल पर बहस के लिए 6 घंटे का समय अलॉट किया गया है।

बता दें कि विधेयक में बंगलादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताडऩा के कारण देश में शरण लेने वाले गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस के साथ साथ असम में अखिल असम छात्र संघ और पूर्वोत्तर राज्यों के अनेक दल तथा सामाजिक संगठन भी विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे हैं।


वर्ष 1985 में हुए असम समझौते में अवैध विदेशियों की पहचान के लिए 24 मार्च 1971 की तारीख तय की गयी थी। विधेयक के विरोध के बीच केन्द्र सरकार ने बुधवार को कहा था कि इस विधेयक में सभी संबंधित पक्षों के साथ साथ 'भारत के हित' का भी ख्याल रखा गया है। मंत्रिमंडल द्वारा विधेयक को मंजूरी दिये जाने के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा था, 'इसमें सभी के तथा 'भारत के हितों' का ख्याल रखा गया है।'


भारतीय जनता पार्टी ने पहले 2014 में और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में इस  विधेयक को पारित कराने का वादा किया था लेकिन यह पिछली बार मंजूरी के बाद लोकसभा भंग होने के साथ निरस्त हो गया। नये विधेयक में पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताडऩा झेलने के कारण मजबूरन यहां शरण लेने आये हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाईयों को नागरिकता देने के लिए नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन का प्रावधान है। केन्द्र सरकार इस विधेयक पर सहमति बनाने की कोशिश में लगी है और शाह ने असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा सहित पूर्वोत्तर में सभी संबंधित पक्षों के साथ इस बारे में चर्चा की है।